ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 501, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे अग्नि! गृत्समद के वंश में उत्पन्न ऋषि तुम्हारे द्वारा सुरक्षित होकर जिस तरह गुहा में
छिपे धनों पर अधिकार कर सके एवं उत्तम संतान पाकर शत्रुओं का सामना कर सके, उसी
तरह कृपा करो. तुम बुद्धिमान् एवं स्तुतिकर्त्ता यजमानों को बहुत धन प्रदान करो. (९)
सूक्त—५ देवता—अग्नि
होताजनिष्ट चेतनः पिता पितृभ्य ऊतये.
प्रत्यक्षज्जेन्यं वसु शकेम वाजिनो यमम्.. (१)
होता, चेतना प्रदान करने वाले और पालक अग्नि पितरों की रक्षा के लिए उत्पन्न हुए हैं.
हम हव्य से युक्त होकर ऐसा धन प्राप्त कर सकेंगे जो अत्यंत पूज्य एवं जीतने योग्य हो. (१)
आ यस्मिन्सप्त रश्मयस्तता यज्ञस्य नेतरि.
मनुष्यद्दैव्यमष्टमं पोता विश्वं तदिन्वति.. (२)
यज्ञ-निर्वाहक अग्नि में सात रश्मियां व्याप्त हैं. वे देवों के पालक अग्नि, मनुष्यों के
पालक ऋत्विज् के समान यज्ञ के आठवें स्थान में बैठते हैं. (२)
दधन्वे वा यदीमनु वोचद्ब्रह्माणि वेरु तत्.
परि विश्वानि काव्या नेमिश्चक्रमिवाभवत्.. (३)
यज्ञ में हवि धारण करता हुआ अध्वर्यु जो मंत्र बोलता है अथवा बुद्धिमान् ऋत्विज् जो
भी कर्म करता है, उन्हें अग्नि उसी प्रकार धारण करते हैं, जिस प्रकार पहिए को नाभि धारण
करती है. (३)
साकं हि शुचिना शुचिः प्रशास्ता क्रतुनाजनि.
विद्वाँ अस्य व्रता ध्रुवा वयाइवानु रोहते.. (४)
शुद्ध प्रशास्ता नामक अग्नि शुद्ध यज्ञ के ही साथ उत्पन्न हुए थे. जिस प्रकार पक्षी फल
पाने के लिए एक शाखा से दूसरी शाखा पर जाता है, उसी प्रकार यजमान अग्नि संबंधी यज्ञों
को निश्चित फलदायक जानकर बार-बार करता है. (४)
ता अस्य वर्णमायुवो नेष्टुःसचन्त धेनवः.
कुवित्तिसृभ्य आ वरं स्वसारो या इदं ययुः.. (५)
यज्ञकर्म करने वाली उंगलियां गायों के समान नेष्टा नामक अग्नि की सेवा करती हैं. वे
ही अग्नि के गार्हपत्य आदि तीन रूपों की भी सेवा करती हैं. (५)
यदी मातुरुप स्वसा घृतं भरन्त्यस्थित. तासामध्वर्युरागतौ यवो वृष्टीव मोदते.. (६)
ebook converter DEMO Watermarks*