ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 304, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंशरीर में वृद्धावस्था उत्पन्न करते हैं. उस अवस्था में पुत्र हमारे रक्षक बन जाते हैं. हमें उस
अवस्था के मध्य में नष्ट मत करना. (९)
अदितिर्द्यौरदितिरन्तरिक्षमदितिर्माता स पिता स पुत्रः.
विश्वे देवा अदितिः पञ्च जना अदितिर्जातमदितिर्जनित्वम्.. (१०)
आकाश, अंतरिक्ष, माता, पिता, समस्त देव, पंचजन, जन्म और जन्म का कारण—ये
सब अखंडनीय अर्थात् अदिति हैं. (१०)
सूक्त—९० देवता—विश्वेदेव
ऋजुनीती नो वरुणो मित्रो नयतु विद्वान्. अर्यमा देवैः सजोषाः.. (१)
उत्तम स्थान को जानने वाले वरुण, मित्र एवं इंद्र आदि देवों के साथ समान प्रेम रखने
वाले अर्यमा हमें सरल मार्ग से गंतव्य पर पहुंचावें. (१)
ते हि वस्वो वसवानास्ते अप्रमूरा महोभिः. व्रता रक्षन्ते विश्वाहा.. (२)
धन देने वाले, मूढ़ताशून्य एवं बुद्धिसंपन्न वे देव अपने तेज द्वारा सदा संसार की रक्षा
कर अपना कर्म करते हैं. (२)
ते अस्मभ्यं शर्म यंसन्नमृता मर्त्येभ्यः. बाधमाना अप द्विषः.. (३)
वे मरणरहित देव हमारे शत्रुओं का नाश करके हम मरणशीलों को सुख दें. (३)
वि नः पथः सुविताय चियन्त्विन्द्रो मरुतः. पूषा भगो वन्द्यासः.. (४)
स्तुति के योग्य इंद्र, मरुद्गण, पूषा एवं भग हमें स्वर्गलाभ के निमित्त उत्तम मार्ग
दिखावें. (४)
उत नो धियो गोअग्राः पूषन्विष्णवेवयावः. कर्ता नः स्वस्तिमतः.. (५)
हे पूषा, विष्णु और मरुद्गण! हमारे यज्ञों को गाय आदि पशुओं से युक्त एवं हमें
विनाशरहित बनाओ. (५)
मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः. माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः.. (६)
यजमान के लिए हवाएं एवं नदियां मधु की वर्षा करें. हमारे लिए ओषधियां माधुर्ययुक्त
हों. (६)
मधु नक्तमुतोषसो मधुमत्पार्थिवं रजः. मधु द्यौरस्तु नः पिता.. (७)
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