ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 28, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ें१२२. विश्वेदेव का वर्णन १-१५
स्तुति, उषा, अन्न, कक्षीवान्, घोषा, नियमन १-७
स्तुति, यक्ष्मा, निडर, प्रशंसा, सोम, राजा इष्टाश्व, इष्टरश्मि, स्वर्णाभूषण धारण करना,
राजा मशशरि व जयशील अयवस ८-१५
१२३. उषा की स्तुति १-१३
अंधकारनाश, पहले जागना, प्रकाश-अंश, घर जाना, नेत्री, धन दर्शाना, पदार्थ
छिपाना, आगे रहना १-८
मिलना, स्पष्ट करना, दर्शनीय, कल्याणकारी, अनुकूलता ९-१३
१२४. उषा का वर्णन १-१३
प्रकाश, वियोग, दिशाएं नष्ट न करना, नोधा ऋषि, सुंदर, प्रसिद्ध, निर्मल, दांत, प्रकाश
करना १-८
बहिन, पणि, लाल बैल जोड़ना, पक्षियों का उड़ना, उन्नति व वृद्धि की प्रार्थना ९-१३
१२५. दान का वर्णन १-७
राजा स्वनय, कक्षीवान्, सोमपान, घृतधाराएं, संतोष १-५
अमर बनना, वृद्धावस्था ६-७
१२६. भावयव्य आदि के दान का वर्णन १-७
स्वनय, कक्षीवान्, रथ देना, लाल घोड़े, गाएं लेना, लोमशा १-७
१२७. अग्नि का वर्णन १-११
अनुसरण, यजनयोग्य, शत्रु, सारवान हव्य, अन्न ग्रहण, पूजनीय, मंथन, हवन १-८
जरा निवारण, स्तुति, परमबली ९-११
१२८. अग्नि का वर्णन १-८
यज्ञवेदी, मातरिश्वा, चारों ओर चलना, अतिथि १-४
हव्य देना, स्वर्ग, पालक, रमणीय ५-८
१२९. इंद्र की स्तुति १-११
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