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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 170, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 170

हे बल के स्वामी इंद्र! तुम्हारी मित्रता पाकर हम शक्तिशाली एवं निर्भय बनें. तुम
अपराजित विजेता हो. हम तुम्हें नमस्कार करते हैं. (२)
पूर्वीरिन्द्रस्य रातयो न वि दस्यन्त्यूतयः.
यदी वाजस्य गोमतः स्तोतृभ्यो मंहते मघम्.. (३)
इंद्र द्वारा किए गए पुराकालीन दान प्रसिद्ध हैं. यदि वे स्तुतिकर्त्ताओं को गाययुक्त एवं
शक्तिपूर्ण अन्न दान करें तो सब प्राणियों की रक्षा हो सकती है. (३)
पुरां भिन्दुर्मुवा कविरमितौजा अजायत.
इन्द्रो विश्वस्य कर्मणो धर्त्ता वज्री पुरुष्टुतः.. (४)
इंद्र ने पुरभेदनकारी, युवा, अमित तेजस्वी, समस्त यज्ञों के धारणकर्त्ता, वज्रधारक एवं
अनेक व्यक्तियों द्वारा स्तुत रूप में जन्म लिया. (४)
त्वं वलस्य गोमतोऽपावरद्रिवो बिलम्.
त्वां देवा अबिभ्युषस्तुज्यमानास आविषुः.. (५)
हे वज्रधारी इंद्र! तुमने गायों का अपहरण करने वाले बल असुर की गुफा का द्वार खोल
दिया था. बलासुर द्वारा सताए हुए देवों ने उस समय निडर होकर तुम्हें घेर लिया था. (५)
तवाहं शूर रातिभिः प्रत्यायं सिन्धुमावदन्.
उपातिष्ठन्त गिर्वणो विदुष्टे तस्य कारवः.. (६)
हे शूर इंद्र! निचोड़े हुए सोमरस के गुणों का वर्णन करता हुआ मैं तुम्हारे धनदानों से
प्रभावित होकर वापस आया हूं. हे स्तुतिपात्र इंद्र! यज्ञकर्त्ता तुम्हारे समीप उपस्थित होने एवं
तुम्हारी कार्यकुशलता को जानते थे. (६)
मायाभिरिन्द्र मायिनं त्वं शुष्णमवातिरः.
विदुष्टे तस्य मेधिरास्तेषां श्रवांस्युत्तिर.. (७)
हे इंद्र! तुमने छल द्वारा मायावी शुष्ण का नाश किया. इस बात को जो मेधावी लोग
जानते हैं, तुम उनकी रक्षा करो. (७)
इन्द्रमीशानमोजसाभि स्तोमा अनूषत.
सहस्रं यस्य रातय उत वा सन्ति भूयसीः.. (८)
शक्ति द्वारा विश्व के स्वामी बनने वाले की स्तुति प्रार्थियों ने की है. इंद्र के धन देने के ढंग
हजारों अथवा हजारों से भी अधिक हैं. (८)
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