ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1607, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंऋषे जनित्रीर्भुवनस्य पत्नीरपो वन्दस्व सवृधः सयोनीः.. (१०)
हे अध्वर्यु! ऐसे जलों की वंदना करो, जो जल के लिए युद्ध करने वाले इंद्र की आज्ञा से
अनेक धाराओं में गिरकर सोमरस में मिलना चाहते हैं, जो संसार को उत्पन्न करने वाले एवं
रक्षक हैं तथा जो सोम के साथ एक ही स्थान में बढ़ते हैं. (१०)
हिनोता नो अध्वरं देवयज्जा हिनोत ब्रह्म सनये धनानाम्.
ऋतस्य योगे वि ष्यध्वमूधः शृष्टीवरीर्भूतनास्मभ्यमापः.. (११)
हे ऋत्विजो! देवपूजा के लिए हमारे यज्ञ को प्रेरित करो, धनप्राप्ति के लिए हमारे पास
स्तुतियां भेजो एवं यज्ञ के अवसर पर हमारे लिए सोमरस से भरा हुआ चर्मपात्र खोलो. हे
ऋत्विजों द्वारा छोड़े जाते हुए जल! तुम हमारे लिए सुखकर बनो. (११)
आपो रेवतीः क्षयथा हि वस्वः क्रतुं च भद्रं बिभृथामृतं च.
रायश्च स्थ स्वपत्यस्य पत्नीः सरस्वती तद्गृणते वयो धात्.. (१२)
हे धनयुक्त जल! तुम धन के निवास हो. हमारे इस कल्याणकारी यज्ञ को पूरा करके
हमारे लिए अमृत लाओ. तुम हमारे धन एवं शोभन संतान के पालक बनो. सरस्वती स्तोता
को धन दें. (१२)
प्रति यदापो अदृशमायतीर्घृतं पयांसि बिभ्रतीर्मधूनि.
अध्वर्युभिर्मनसा संविदाना इन्द्राय सोमं सुषुतं भरन्तीः.. (१३)
हे जल! मैं देखता हूं कि तुम मेरे यज्ञ की ओर आते हुए घृत, दूध एवं शहद लाते हो.
अध्वर्यु हमारे साथ सच्चे मन से बात करते हैं तथा तुम भली प्रकार निचोड़ा हुआ सोम इंद्र के
लिए धारण करते हो. (१३)
एमा अग्मन्नेवतीर्जीवधन्या अध्वर्यवः सादयता सखायः.
नि बर्हिषि धत्तन सोम्यासोऽपां नप्त्रा संविदानास एनाः.. (१४)
हे अध्वर्यु मित्रो! धन से युक्त व जीवों के लिए लाभकारी जल हमारे यज्ञ की ओर आ
रहे हैं. तुम जल को स्थापित करो. इन जलों का वर्षा के देव अर्थात् अपांनपात् से परिचय है.
सोमरस से मिलाने योग्य इस जल को कुशों पर स्थापित करो. (१४)
आगमन्नाप उशतीर्बर्हिरिदं न्यध्वरे असदन्देवयन्तीः.
अध्वर्यवः सुनुतेन्द्राय सोममभूदु वः सुशका देवयज्या.. (१५)
कामना करता हुआ जल हमारे यज्ञ की वेदी पर बिछे कुशों पर आता है एवं देवों को
प्रसन्न करने की अभिलाषा से स्थित होता है. हे अध्वर्युजनो! ऐसा जानकर तुम इंद्र के लिए
सोमरस निचोड़ो. जल के आने के कारण ही इस समय तुम्हारा देवयज्ञ सरल हो सका है.