ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 143, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंवीरप्रसविनी, प्रेरणा, जरुथ, रूप धरना, घिरना, गंधर्ववचन, स्तुति रचना १-७
८१. सृष्टिक्रम का वर्णन १-७
आच्छादन, विश्वकर्मा, निर्माण, भुवन, परम धाम, स्वर्गफलदाता, सुखोत्पादक १-७
८२. सृष्टिक्रम का वर्णन १-७
भाग, सप्तर्षि, भुवन, धन व्यय, ईश्वर, ब्रह्मांड, स्तुतियां १-७
८३. क्रोध की स्तुति १-७
उत्पादक, मन्यु, शक्तिशाली, सहनशील आह्वान, बंधु, होम १-७
८४. क्रोध की स्तुति १-७
नेता, धन मांगना, उग्र बल, शत्रुजेता, स्तोत्र, तेजधारक, अन्न याचना १-७
८५. सोम की स्तुति एवं वर्णन १-४७
रोकना, नक्षत्रों के निकट, पीसना, सुरक्षित, वर्षरक्षक, वस्त्र गाथा, कोष, अग्रगामी,
रथमार्ग १-११
गाड़ी, दहेज, समर्थन, रथचक्र, पहिया, नमस्कार, ऋतुनिर्माण, चिरजीवन देना, अमृत
स्थान, स्तुति, पूजन १२-२२
अर्यमा देव, स्थापना, सौभाग्य, पूषा, समृद्ध बनने का आग्रह, प्रवेश, श्रीहीन, रोग,
शत्रु, रक्षार्थ प्रार्थना, आशीर्वाद, वधूवस्त्र, सूर्या, गृहस्थ धर्म, कल्याणी बनाने की
प्रार्थना, संतानरहित पति २३-३८
शतायु की कामना, तीसरा पति, धन व पुत्र मिलना, पुत्र व नाती, कल्याणकारक बनने
की कामना, वीरजननी, वधू व महारानी बनने का आशीर्वाद, हृदयों को मिलाने हेतु
प्रार्थना ३९-४७
८६. इंद्र एवं इंद्राणी का संवाद १-२३
वृषाकपि, सोमरस, अन्नदाता, कुत्ता, दुष्कर्मी उत्तम इंद्र, प्रिय वचन, वीरपत्नी, सखा,
आदर पाना १-१०
बुढ़ापा, समीप जाना, हवि, बैल पकाना, दधिमंथन, समर्थ-असमर्थ, गाड़ी, दास व
आर्य ११-१९
दूरी, आह्वान, पुत्र जनना २०-२३
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