ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 115, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ें७६. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६
आह्वान, सोमपान हेतु आह्वान, अन्न हेतु बुलाना १-६
७७. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-६
बुलाना, गाएं व अन्न मांगना, रोकने में असमर्थ, शत्रुसंहार १-४
द्युलोक से भी महान्, धनस्वामी ५-६
७८. मरुतों एवं इंद्र की स्तुति १-७
सूर्य बनाना, मित्रता, वृत्रनाश, महान् अन्न, धरती दृढ़ करना, हराना, दुधारू बनाना,
सूर्य १-७
७९. इंद्र की स्तुति १-६
बुलाने योग्य, धनदाता, स्तुति, संहारक, शक्तिस्वामी, धन मांगना १-६
८०. इंद्र की स्तुति १-७
अपाला, सोमपान हेतु जाना, कामना, धनयाचना, खेत उपजाऊ बनाने व बाल उगाने
की प्रार्थना, प्रभावान करना १-७
८१. इंद्र की स्तुति १-३३
धनदाता, आहूत, अन्नदाता, सुदक्ष ऋषि, बढ़ाना, हराना, व्याप्त, आह्वान, शत्रुनाशक,
शत्रुओं का धन देने व पास आने की प्रार्थना १-१०
वज्रधारी, प्रसन्न करना, इच्छाएं रखना, बलपुत्र, भयानक प्रसन्न बनाने की प्रार्थना,
बलदाता, दर्शनीय, स्तुति, बुलाना, विस्तार, इंद्र से बढ़कर न होना, प्रवेश ११-२३
पर्याप्त होना, श्रुतकक्ष, दानशील, धन मांगना, शूर, धनधारक, अन्नस्वामी, अधिकारी
न बनने की प्रार्थना, सबके इंद्र, स्तुतियों द्वारा सेवा २४-३३
८२. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-३४
हितैषी, मेघ हनन, धन मांगना, सज्जनपालक, सामने जाना, आह्वान, तेजस्वी,
दीप्तिशाली, स्तुत, विरोध न होना, पूजा १-१२
दूध धारण, बली, भागना, अजातशत्रु, शक्तिशाली, कामनापूरक, सोमपान, रमण, धन
मांगना, पास जाना, विसर्जन, हरि नामक घोड़े १३-२४
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