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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1109, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1109

सूर्य ऊपर की ओर उठते हुए विस्तृत एवं अधिक तेज का आश्रय लें एवं मानवों के
सभी समूहों को सहारा दें. वे दिन में चमकते हुए समान दिखाई देते हैं. वे प्रजापति द्वारा की
गई स्तुतियां सुनकर तीव्र बनें. (१)
स सूर्य प्रति पुरो न उद्गा एभिः स्तोमेभिरेतशेभिरेवैः.
प्र नो मित्राय वरुणाय वोचोऽनागसो अर्यम्णे अग्नये च.. (२)
हे सूर्य! इन स्तोत्ररूपी गतिशील अश्वों के द्वारा तुम ऊपर उठते हुए हम सबके सामने
गमन करो. तुम मित्र, वरुण, अर्यमा एवं अग्नि के पास जाकर हमें निरपराध बताना. (२)
वि नः सहस्रं शुरुधो रदन्त्वृतावानो वरुणो मित्रो अग्निः.
यच्छन्तु चन्द्रा उपमं नो अर्कमा नः कामं पूपुरन्तु स्तवानाः.. (३)
दुःख रोकने वाले एवं सत्ययुक्त वरुण, मित्र तथा अग्नि हमें हजारों की संख्या में धन दें.
वे प्रसन्नताकारक देव हमें प्रशंसनीय एवं आदरयोग्य वस्तुएं दें तथा हमारी स्तुति सुनकर
हमारी अभिलाषाएं पूरी करें. (३)
द्यावाभूमी अदिते त्रासीथां नो ये वां जज्ञुः सुजनिमान ऋष्वे.
मा हेळे भूम वरुणस्य वायोर्मा मित्रस्य प्रियतमस्य नृणाम्.. (४)
हे अखंडनीय एवं महती द्यावा-पृथिवी! हम सुंदर जन्म वाले तुम्हें जानते हैं. तुम हमारी
रक्षा करो. हम वरुण, वायु एवं मानवों के प्रिय मित्र के क्रोध के पात्र न बनें. (४)
प्र बाहवा सिसृतं जीवसे न आ नो गव्यूतिमुक्षतं घृतेन.
आ नो जने श्रवयतं युवाना श्रुतं मे मित्रावरुणा हवेमा.. (५)
हे मित्र व वरुण! अपनी भुजाएं फैलाओ एवं हमारे जीवन के लिए उस भूमि को जल से
सींचो, जिस पर हमारी गाएं चलती हैं. तुम हमें मनुष्यों में प्रसिद्ध बनाओ. हे नित्य तरुणो!
हमारी पुकार सुनो. (५)
नू मित्रो वरुणो अर्यमा नस्त्मने तोकाय वरिवो दधन्तु.
सुगा नो विश्वा सुपथानि सन्तु यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (६)
मित्र, वरुण एवं अर्यमा हमारे लिए एवं हमारे पुत्रों के लिए धन दें. सभी मार्ग हमारे लिए
उत्तम एवं चलने में सरल हों. हे देवो! तुम अपने कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो.
(६)
सूक्त—६३ देवता—सूर्य व वरुण
उद्वेति सुभगो विश्वचक्षाः साधारणः सूर्यो मानुषाणाम्.
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