सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)

ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)

Ribhu Gita of Shiva Rahasya Hindi

महर्षि ऋभु / महर्षि निदाघ द्वारा

स्रोत: Ribhu Gita Sanskrit Shlokas with Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished249 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 249 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 41

॥ सप्तमोऽध्यायः ॥

ऋभुः -

अत्यद्भुतं प्रवक्ष्यामि सर्वलोकेषु दुर्लभं ।
वेदशास्त्रमहासारं दुर्लभं दुर्लभं सदा ॥ 7.1॥

अखण्डैकरसो मन्त्रमखण्डैकरसं फलं ।
अखण्डैकरसो जीव अखण्डैकरसा क्रिया ॥ 7.2॥

अखण्डैकरसा भूमिरखण्डैकरसं जलं ।
अखण्डैकरसो गन्ध अखण्डैकरसं वियत् ॥ 7.3॥

अखण्डैकरसं शास्त्रं अखण्डैकरसं श्रुतिः ।
अखण्डैकरसं ब्रह्म अखण्डैकरसं व्रतं ॥ 7.4॥

अखण्डैकरसो विष्णुरखण्डैकरसः शिवः ।
अखण्डैकरसो ब्रह्मो अखण्डैकरसाः सुराः ॥ 7.5॥

अखण्डैकरसं सर्वमखण्डैकरसः स्वयं ।
अखण्डैकरसश्चात्मा अखण्डैकरसो गुरुः ॥ 7.6॥

अखण्डैकरसं वाच्यमखण्डैकरसं महः ।
अखण्डैकरसं देह अखण्डैकरसं मनः ॥ 7.7॥

अखण्डैकरसं चित्तं अखण्डैकरसं सुखं ।
अखण्डैकरसा विद्या अखण्डैकरसोऽव्ययः ॥ 7.8॥

अखण्डैकरसं नित्यमखण्डैकरसः परः ।
अखण्डैकरसात् किंचिदखण्डैकरसादहं ॥ 7.9॥

अखण्डैकरसं वास्ति अखण्डैकरसं न हि ।
अखण्डैकरसादन्यत् अखण्डैकरसात् परः ॥ 7.10॥

अखण्डैकरसात् स्थूलं अखण्डैकरसं जनः ।
अखण्डैकरसं सूक्ष्ममखण्डैकरसं द्वयं ॥ 7.11॥

अखण्डैकरसं नास्ति अखण्डैकरसं बलं ।
अखण्डैकरसाद्विष्णुरखण्डैकरसादणुः ॥ 7.12॥

अखण्डैकरसं नास्ति अखण्डैकरसाद्भवान् ।
अखण्डैकरसो ह्येव अखण्डैकरसादितं ॥ 7.13॥