ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)
Ribhu Gita of Shiva Rahasya Hindi
महर्षि ऋभु / महर्षि निदाघ द्वारा
स्रोत: Ribhu Gita Sanskrit Shlokas with Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकरसुकुरङ्ग जटधृतगङ्ग
यमिहृदिसङ्ग भजशिवलिङ्ग भवभयभङ्ग ॥ ३.८॥
शम्बरकरशर दम्बरवरचर डम्बरघोषण दुम्बरफलजग
निकुरुम्बभरहर जम्बितहृदिचिर लम्बितपदयुग
लम्बोदरजनकान्तकहर शिव बिन्दुवरासन
बिन्दुगहन शरदिन्दुवदनवर कुन्दधवल गणवृन्दविनुत
भवभयहर परवर करुणाकर फणिवरभूषण
स्मर हर गरधर परिपाहि ॥ ३.९॥
रासभवृषभेभ शरभाननगणगुणनन्दित-
त्रिगुणपधातीग शरवणभवनुत तरणिस्थित वरुणालय
कृतपारण मुनिशरणायित पदपद्मारुण पिङ्गजटाधर
कुरु करुणां शंकर शं कुरु मे ॥ ३.१०॥
जम्भप्रहरण कुम्भोद्भवनुत कुम्भप्रमथ निशुम्भद्युतिहर
खण्डद्रणगण डिम्भायितसुर तारकहरसुत
कुम्भ्युद्यतपद विन्ध्यस्थितिदितिमान्ध्यप्रहर मुदान्धद्विपवर
कृतिप्रवर सुधान्थोनुतपद बुद्ध्यागमशिव
मेध्यातिथिवरद ममावन्ध्यं कुरु दिवसं
तव पूजनतः परिपाहि शम्भो ॥ ३.११॥
कुन्दसदृश मकरन्दनिभसुरवृन्दविनुत कुरुविन्दमणिगण
वृन्दनिभांघ्रिजमन्दर वसदिन्दुमकुट शरदमम्बुजक्यश
गरनिन्दनगल सुन्दरगीरितनयाकृति
देहवराङ्गबिन्दुकलित शिवलिङ्गगहन सुतसिन्दूरवरमुख
बन्धुरवरसिन्धुनदीतट लिङ्गनिवाहवरदिग्वस पाहि शम्भो ॥ ३.१२॥
पन्नगाभरण मारमारण विभूतिभूषण शैलजारमण ।
आपदुद्धरण यामिनीरमणशेखर सुखद पाहि शम्भो ॥ ३.१३॥
दक्षाध्वरवरशिक्ष प्रभुवर त्र्यक्ष प्रबलमहोक्षस्थित
सितवक्षस्स्थ लकुलचक्षुःश्रवस वराक्षस्रज हर ।
वीक्षानिपाताधोक्षजात्मज वरकक्षाश्रय पुरपक्षविदारण
लीक्षायितसुर भिक्षाशन हर पद्माक्षार्चनतुष्ट
भगाक्षिहराम्यय शंकर मोक्षप्रद परिपाहि महेश्वर ॥ ३.१४॥
अक्षयफलद शुभाक्ष हराक्षततक्षककर
गरभक्ष परिस्फुरदक्ष क्षितिरथ सुरपक्षाव्यय ।