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सर्वकोश
रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)

रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)

Ratnavali Natika of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 362, कुल 520 में से

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पृष्ठ 362

ह
under ह? No, ह is separate. Next is a conjunct of two टs: ट्ट.
Wait, is it हट्टअ or हडक?
Let's look at अ: अ is clearly the letter after it: हट्टअ !.
Yes, देवहट्टअ !

  • असामण्णरूवसोहा तादिसो तुए जइ णिम्मिदा ता कीस उण
    • तादिसो: wait, is it तादिसो or तादिसी?
    • Sanskrit chhaya (L15): असामान्यरूपशोभा तादृशी त्वया यदि निर्मिता...
    • In line 7: तादिसो! Look at the letter: त, ा, द, ि, स, ो -> तादिसो. Yes, it clearly has an o-matra: तादिसो.
  • ईदिसं अवत्थंतरं पाविदा । इअं च रअणमाला जीविद-
    • अवत्थंतरं: अ, व, त्थ, ं, त, र, ं. Yes.
    • पाविदा: प, ा, व, ि, `