रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
पृष्ठ 34, कुल 368 में से
संदर्भ में पढ़ेंसमीक्षा भाग १५
यह कथन समस्या का सरल समाधान नही, वरन् समस्या को और उलझा
देने वाला है । इस कथन से उपस्थित समस्याये ये हैं—
१. रसखान का अभिप्राय किस गदर से है ? यह गदर कब हुआ ?
२. रसखान ब्रज मे कब आये ?
३. रसखान की प्रेयसी कौन थी जिसे ये ठुकराकर ब्रज आये ?
४. 'प्रेमवाटिका' की रचना करते समय रसखान की आयु क्या थी ?
हिन्दी-विद्वान् उपर्युक्त प्रथम दो प्रश्नो को तो प्रायः उपेक्षित कर गए हैं ।
'प्रेमवाटिका' के रचना-काल को सर्वाधिक महत्त्व देकर इसके आधार पर रस-
खान के जो विभिन्न काल निर्णीत किए गए है, वे इस प्रकार है—
१ 'शिवसिंह-सरोज' के लेखक शिवसिंह ने इनका जन्म संवत् १६३०
माना है ।
२. 'शिवसिंह-सरोज' के मत को आधार मानकर ही बाबू राधाकृष्णदास
ने 'सूरसागर' की भूमिका मे रसखान का जन्म संवत् १६३१ स्वीकार
किया है ।
३ पं० किशोरीलाल गोस्वामी ने स्व-सम्पादित 'प्रेमवाटिका' के द्वितीय
संस्करण मे रसखान का समय सोलहवी शताब्दी निश्चित किया है ।
४. 'रसखान और घनानंद' नामक कृति के सम्पादक बाबू अमीरसिंह ने
पं० किशोरीलाल गोस्वामी के मत को ही मान्यता प्रदान की है ।
५. मिश्रबन्धुओं ने 'मिश्रबन्धु-विनोद' में रसखान का जन्म संवत् १६१५
में और देहावसान संवत् १६८५ मे माना है ।
६ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने रसखान के केवल कविता काल का उल्लेख
किया है जो संवत् १६४० के उपरांत है ।
७. डॉ० रामकुमार वर्मा ने संवत् १६७१ को ही रसखान का कविता-
काल माना है ।
ये मत मुख्यतः 'प्रेमवाटिका' के रचना काल पर ही आधृत हैं ।
कुछ विद्वानो ने 'दिल्ली के गदर' के आधार पर रसखान के समय का
निर्णय करने के प्रयास किये हैं । श्री अमृतलाल शील ने दिल्ली की इस दुर्घ-
टना को नादिरशाह के भीषण आक्रमण से जोड़कर रसखान का समय
गोस्वामी विट्ठलनाथ से १५० वर्ष पश्चात् माना है । पर शील जी अपने मत