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रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

पृष्ठ 107, कुल 368 में से

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पृष्ठ 107

६० रसखान-ग्रन्थावली
'नाह-वियोग बढ़यौ रसखानि मलीन महा द्युति देह तिया की ।
पंकज सो मुख गो मुरझाय लगी लपटें बरि स्वाप हिया की ।
ऐसे मैं आवत कान्ह सुने हुलसै तरकी जु तनी अंगिया की ।
यो जग जोति उठी अंग की उसकाड दई मनी बाती दिया की ॥'
इसमे आगतपतिका है, क्योकि विरहिणी को उसके प्रियतम के आने का
समाचार मिल गया है ।
नायक और नायिका का सयोग कराने मे नायिका की सखियो का भी
महत्त्वपूर्ण योगदान होता है । वे उसे प्रेरित करके नायक के पास भेज ही देती
हैं । निम्नलिखित सवैये मे अपनी सखी को प्रेरित करती हुई एक गोपी कहती
है कि न जाने मिलन का ऐसा अवसर फिर मिले या न मिले, अत. तुम शीघ्र
ही कृष्ण से जाकर मिल तो—
'सोई है रास मैं नैसुक नाचि कै नाच नचायो कितौ नदनंद जिन ।
सोई है री रसखानि किते मनुहारिन सूधैं चितौत न दो छिन ।
तो मै धौं कौन मनोहर भाव बिलोकि भयौ बस हाहा करी तिन ।
औसर ऐसो मिलै न मिलै फिरि लंगर गोठौ कनौड़ौ करै बिन ॥'
संयोग-शृंगार के अन्तर्गत रसखान ने मिलन का वर्णन भी दिया है और
सुरत का भी । मिलन का वर्णन इस सवैये मे निहित है—
'एक समै इक ग्वालिन को ब्रजजीवन खेलत दृष्टि पर्यो है ।
बाल प्रवीन सकै करिकै सरकाइ कै मोरन चीर धर्यो है ।
यां रस ही रस ही रसखानि सखी अपनो मनभायो कर्यो है ।
नन्द के लाडिले ढाँकि दै सीस हहा हमरो बरु हाय भर्‌यौ है ॥'
रसखान ने सुरत और सुरतान्त का भी वर्णन किया है । यथा—
'बह सोई हुती परजंक लली लला लीनो सु आइ भुजा भरिकै ।
अकुलाइ कै चौकि उठी सु डरी निकरी चहै अंकनि तें फरिकै ।
झटका झटकी मैं फटी पहुचा टरकी अंगिया मुकना फरिकै ।
मुख बोल कठे रिस मे रसखानि हटो जू लला निबिया धरिकै ॥'
इस सवैये मे सुरत का वर्णन है । नायिका पलंग पर सोई हुई थी कि अचा-
नक कृष्ण वहाँ पहुँच गए और उसे अपनी बाहुओ के पाश मे बाँध लिया । वह