रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)
Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan
महाकवि केशवदास द्वारा
प्रतीकानुक्रमणी २८५
केसव नैननि ।८।१४-सू खेलत बोलत ।६।३६
केसव प्रोषितप्रेयसी ।७।३ खेलत हे हरि ।६।४६
केसव फूलि नचीं ।३।२१ खेल न हाँसी ।८।३६
केसवराइ की सौहैं ।३।७३ खोट तुरो ।१२।१८
केसवराय बुलावत हैं ।१३।१६ गति गजराज ।१४।२५
केसव रूठि रह्यो ।१२।६ गर्व, ब्यसन ।१०।३२
केसव सुधि बुधि ।८।४१ गर्व हर्ष आबेग ।६।१३
केसव सूधे विलोचन ।२।५ गाहत सिंधु ।१६।५
केसौदास कौन बड़ी ।१३।१८ गिरि गिरि उठि ।१४।१४
केसौदास घर घर ।५।१८ गूढ़ अगूढ़ ।८।४३
केसौदास दिनराति ।१०।२२ गूढ़ भाव को ।६।५४
केसौदास नेहदसा ।४।६ गेह की नेह ।१२।२८
केसौदास न्हान ।१६।७ गोप बड़े बड़े ।७।३२
केसौदास बाल ।१४।३४ घननि की घोर ।१०।२७
केसौदास लाख ।१५।६ घेरि घने घन ।१५।७
केसौदास सकल ।८।१८ घेरी जिनि मोहिं ।१२।१४
केसौदास सबिलास ।३।४० घोरि घनो घनसार ।८।२८
केहरी कपोत ।१४।२२ चंचल न हूजै ।३।२३
कैसैं कै मलयै ।८।१५ चंद को सो ।३।३४
कोकनि की कारिका ।१०।२५ चंद चढ़ाइ ।७।३०
कोकिल केकी ।११।१० चंद नहीं बिषकंद ।८.३१
कोपसील कोबिद ।३।८ चंदन बिटप ।७।११
कोमल अमल दल ।१०।८ चंपे की सी ।१४।२०
कोमल कमल ।१२।१३ चकित चित्त ।७।२६ सू
कोमल बिमल मन ।६।२५ चपला न चमकति ।१०।२१
कौन कें न ।११।६ चपला पट मोर ।६।२६
कौनहुँ हेत ।७।७ चहूँ ओर चितवै ।७।२६ सू
कौनहूँ तोष ।१२।२४ चित चोप ।२।६
कौने रसै बिहँसै ।६।४० चितवौ चितबाएँ ।३।६१
कौ लौं पीहौ ।४।१६ चोरि चोरि चित ।५।६
खंजन हैं मतरंजन ।८।२२ चोली को सो ।७।६
खरे उपचार ।८।४६ छवि सों छबीली ।६।२८
खान पान ।११।१२ सू छार-गंध-जुत ।३।६
खारिक खात न ।१४।३६ छुटै न छूटाएँ ।१२।२५
२८६ रसिकप्रिया
छुवौ जनि हाथ ।५।१४ सू
छूटि जात केसव ।११।१
छोरि छोरि बाँधौ ।५।११
जगनायक की नायिका ।३।७४
जनी सहेली धाइ ।५।२४
जनी सहेली सोभहीं ।७।२६ सू
जब चितवै ।५।५
जहँ गुनगन ।८।२०
जहँ परिजन ।१४।१५
जहँ सिंगार ।१६।२
जहँ सुनियै ।१४।८
जहाँ दंपती ।१६।४
जहां न मानै ।६।१८
जहां लोभ तैं ।१०।७
जहाँ हँसहि ।१४।१२
जहीं रहीं दुरै ।१२।१०
जहीं सोक मंहि ।१६।६
जाको प्रीतम ।७।१६
जाति भई संग ।५।२१
जातु नहीं कद
प्रतीकानुक्रमणी [L01_page_number] २८७
बायाँ स्तम्भ (Left Column)
दरस रमन ।४।१६
दसन-बसन मांझ ।१४।७
दिनप्रति जहँ ।१।५
दीनो मैं पाइ ।१३।१३
दीन्ही ताहि ।१।२
दीरघ दरीनि बसै ।११।१८
दुखदायक ह्वै ।८।३०
दुरिहै क्यों ।६२।१३
दुर्लभ देवनिहूँ ।१।१६
दूती सों संकेत ।७।२२
दूरि तें देखिवे ।५।१४
देखत उदधिजात ।७।२४
देखत काहू ।६।६
देखतहीं दुति ।८।३
देखतही चि० ।५।२६
देखतही जिहि ।६।५३
देखन को प्रिय ।४।३ सू
देखी है गुपाल ।३।५२
देखै नहीं ।१४।३८
देस काल बुधि ।१०।२६
देहि री काल्हि ।५।३५
दै दधि दीनो ।१६।६
धनु भू धरि ।३।२१ सू
धाइ, जनी ।१२।१
धाई नहीं घर ।५।१५
धीरा बोले ।३।४६
नंदनंदन खेलत ।६।३२
नख-पद-पदवी ।४।१४
नदी बेतवै ।१।३
नयन बयन कछु ।१४।१
नवल-अनंगा ।३।२१
नवलबधू नवजोबना ।३।१७
नवहू रस के ।१।६
नाह लगे मुख ।१३।२
दायाँ स्तम्भ (Right Column)
नाहीं सिखावति ।१३।६
निंदामय बीभत्स ।१४।३०
निपट कपट हर ।४।१८
निर्बेद ग्लाने ।६।१२
नींद भूख दुति ।४।३
नीरहि तौ बिन ।१०।१६
नील निचोल ।७।३८
नृत्य गीत कबिता ।३।५
नेह-भरे लै ।२।१५
नैननि की चतुराई ।७।२८
नैननि के तारनि ।५।२७
नैननि नवावौ ।१२।१६
नैन बैन मन ।८।१०
न्योति कै बुलाई ।५।३४
पंथ न थकत ५।२०
पति को अति ।३।६३
परकीया द्वै भांति ।३।६८
पल ही पल ।८।५१
पहिले तजि आरस ४।५
पहिले सो हिय ।२।७
पहिले हठि ।६।५२
पाइ परै पलिका ।१२।११
पाइ परै मनुहारि ।३।२७
पाइ परेहू तें ।७।१५
पाइ परौं बलि ।८।११
पाग बनी अरु ।१३।१४
पान न खाए ।६।४७
पायन को परिबो ।६।२२
पिय सों प्रगटन ।५।४
पियहि मनावै ।१०।१८
पूरन-प्रेम,प्रताप तें उपजि ।६।१
पूरन-प्रेम-प्रताप तें भूलत ।६।१८
पूरन-प्रेम-प्रभाव ।६।२७
प्यास द्वै रही ।५।३
? No, it's प्रीत बिना । १०।३१. Wait, look at the top of त: there's an anusvara or dot? प्रीत बिनाorप्रीति बिना? Wait, look closely: there's a matra? No, the top bar connects, but there is no left-curving loop for 'ि'. It's प्रीत बिना! Wait, there is a dot above: प्रीत बिनाorप्रींत बिना? A tiny speck. Let's transcribe प्रीत बिना । १०।३१`.
- Line 22:
बड़ी जिय लाज । १२।८- yes,जिय! - Line 24:
बन में बृषभानुकुमारि । १२।०or१२।८?
Wait, look at line 24:१२।०. Wait, could that be८? No, look at८in line 22 (१२।८) and line 21 (८।४). An८in this font looks like an English8or a Devanagari८(which is like an open loop or inverted cursive). Wait, the८in line 21 (८।४) is Devanagari८(a loop with an open top-right or curve).
In line 24, it's a closed circle/oval:०! So
यहाँ प्रस्तुत पृष्ठ का लिप्यंतरण दिया गया है:
| १६ | प्रतीकानुक्रमणी | २८६ |
|---|
स्तम्भ १
भाव सु पंच ।६।२
भुवमंडल ।१४।२८
भूल होइ ।४।१४ सु
भूलि जाइ सुधि ।८।४८
भूषन भुषिबे को ।६।४५
भूषन-भेद बनाइ ।१३।८
भेद की बात ।१४।५
भोजन कै बृषभानु ।६।५०
भौंरिनी ज्यौं ।११।१७
मंदहास कलहास ।१४।२
मत्तगय'दनि साथ ।१०।६
मध्या आरूढ़जोबना ।३।३३
मध्या आरूढ़जोबना प्र० ।३।३२
मन मन मिलैं ।१२।१६
मनमोहिनी मोहि ।६।२६
मनसा बाच ।२।१६
मरन सु केसवदास ।८।५४
माखन के चोर ।१४।३६
माता ही को ।१४।३१
मान करै ।७।३५
मान करै लघु ।७।३७
मान तजहिं ।१०।१
मान बिबिध ।१०।३३
मान मनावतहूँ ।७।१३
मान-मुचावन बात ।१०।२०
मानहिं मान ।१।२०
मिलिबे कौं एक ।१५।३
मींडि मारघो ।१४।२३
मुँह मीठी ।२।११
मुकतामनीन की ।३।२३ सु
मुख रूखी बातैं ।३।६५
मुग्धा, मध्या ।३।१६
मुग्धा मान करै ।३।३०
मुग्धा लज्जाप्रायरति ।३।२४
मुग्धा सुख्व करै ।३।२८
मुग्धा सोइ रहै ।३।२६
स्तम्भ २
मेघनि ज्यों ।८।३३
मेरे कहे दहिये ।६।३४
मेरे तो नाहिन ।२।६
मेरे मिलाएहीं ८।२७
मेरौ मुख चूमें ।५।१०
मैं पठई मति ।११।३
मैन ऐसो मन ।११।१५
मोट्टाइत सुनि ।६।१७
मोहन मरीचिका ।८।३६
मोहन-साथ कहा ।१२।३
मोहिबो मोहन ।३।१६
यह संजोग सिंगार ७।४४
याही को मेरौ ।१२।२७
ये गुन केसव ।२।२
य सब जितनी नाइका ।७।१
ये सब जितनी नायिका ।५।४०
यों परछन्न प्रकास ।१।२८
यों हीं पीय ।५।८
रच्यो बिरंचि ।१।७
रति उपजै ।८।५५
रति-मति की ।१।१७
रति हाँसी अरु ।६।६
राधा राधारमन के करच्यो ।१३।२२
राधा राधारमन के कह ।६।५७
राधा राधा-रवन ।६।२१
राधिका की जननी ।८।१६
रामजनी, सन्यासिनी ।१२।२
रितु ग्रीषम ।५।३७
रीझि रिझाइ ।१३।७
रुचि पंकज ।२।१२
रूठिबे को तूठिबे ।४।१०
रूठै बारहिं बार ।७।३६
रूप प्रेम के ।६।४२
रोष में रस ।१४।२६
लंघतु है ।४।१७
लाज न गारिहु ।२।१४
लाड़िली लीनी ।७।२६
२६० रसकप्रिया
लीनो हम मोल ।७।२७ सोचि सखी भरि ।८।३३
लोकलीक उल्लंघि ।६।६ सोधि निदाननि ।५।३३
लोचन ऐंचि ।४।८ सो नवजोबनभूषिता ।३।२०
लोचन बीच चुभी ।८।२४ सो प्रकास संजोग ।१२।१
लोल अमोल ।१२।२१ सो प्रच्छन्न ।१।१६
वा मृगनैनी ज्यों ।१२।२६ सोभा को सघन ।१२।५
श्रम अभिलाष ।६।३६ सोरहई सिंगार ।३।४२ सू
श्रीवृषभानुकुमारिहेत ।१।२ सो लब्धापति ।३।५७
संपति विपति ।३।१५ सो समस्तरसकोबिदा ।३।५१
संबत सोरह सै ।१।११ सोंह को सोचु ।२।१७
सखि गोकुल गोप ।६।५६ सौंहनि को सोच ।१३।१६
सखि ज्यों उनको ।६।१७ सौंहें दिवाय ।४।१५
सखि बात सुनौ ।१४।१७ स्तंभ स्वेद ।६।१०
सजल चकित ।८।४४ स्वाधिनपतिका, उत्कहीँ ।७।२
सब तें पर ।३।६७ स्वेद मदन-जल ।३।१२
सब तें होइ उदास ।१४।३७ हँसत कहत ।३।४
सब देह भई ।३।१३ हँसत खेलत ।५।२८
सब विभाव ।६।४ हँसति हँसति ।१०।१०
सलज सुबुद्धि ।३।३ हँसि बोलतहीं ।१६।३
सहज सुगंध ।३।२ हरित हरित ।१२।४
साम दान ।१०।२ हरि राधिका ।५।३६
सिक्षा, विनय ।१३।१ हरि से हितू ।२।८
सिबै हारी सखी ।१३।१२ हाँसी में बातक ।१२।१२
सिगरी मध्या तीन ।३।४५ हाँसी में हँसे ।१२।२२
सीतल समीर ।१२।५ हित कै इत ।३।६२
सीतलहु हीतल ।१२।२६ हित तें कै ।७।२५
सील रूप ।४।१४ सू हेला लीला करि ।६।४८
सुंदरता पय पावक ।३।४४ हेला लीला ललित ।६।१६
सुख दैके सब ।१०।११ है कोइ माई ।८।१४
सुख दें सखीन ।३।२६ है गति मंद ।३।५४
सुख में दुख ।११।२ है तरुनाई ।११।६
सुधि बुद्धि ।८।११ होइ अचंभो ।१४।३३
सुधि भूल गई ।७।६ होइ कहा अब ।७।३६
सुनि समस्तरसकोबिदा ।३।५० होइ भयानक ।१४।२७
सुभग दसा ।८।१७ हो मन मैलो ।३।६६
शुभ संजोग ।१।१८ होहि बीर ।१४।२४
सूल से फूल ।७।२३ होहि रौद्र रस ।१४।२१
सो आक्रामित ।३।५५ हौं सुख पाइ ।३।६४
हौं उनके तनताप ।८।४७