रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)
Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें:२०४ रसिकप्रिया
शब्दार्थ—चपला = बिजली । सयन = ( सैन्य ) सेना । दमामे=नगाड़े ।
दीह = दीर्घ, बड़े । दिनमनि =सूर्य । लाज के लीने = लाज को लिए हुए,
मारे लज्जा के । साँवरे = श्रीकृष्ण । तमराज = अंधकार रूपी नृपति ।
भावार्थ—( सखी उक्ति नायिका प्रति—वर्षा के समय नायिका ने मान
किया है सखी विषयांतर करके नायिका का मानमोचन करना चाहती है) यह
बिजली नहीं चमक रही है, हथियारों की चमक है । ये मोर नहीं बोल रहे हैं,
सेना के वंदी हैं ( जो वीरों की प्रशस्ति पढ़ रहे हैं ) । जहाँ तहाँ बादल नहीं
गरज रहे हैं, बड़े बड़े नगाड़े बज रहे हैं । इसके आतंक से भय के कारण
लज्जित होकर सूर्य ने अपना मुंह छिपा लिया है ( वह बादलों के आवरण से
प्रकृत्या ढका नहीं है, सेना से भयभीत होकर छिप गया है ) । इसलिए हे चंद्र-
मुखी, श्याम-सखा के पास तू शीघ्र ही चल क्योंकि वे शत्रु के सुखों के शोषक
हैं ( शत्रु को नष्ट करनेवाले हैं ) । ये बादल आकाश में नहीं घूम
रहे हैं, महाराज अंधकार के ये वीर हैं जो वायु रूपी घोड़ों पर चढ़कर
चंद्रमा को ढूँढ़ते फिर रहे हैं ( तू चंद्रमुखी है कहीं तेरे ही ऊपर आक्रमण
न कर बैठें ) ।
अलंकार—अपह्नति और रूपक का संकर ।
श्रीकृष्णजू की उपेक्षा, यथा—( कबित्त )
(३८१) केसौदास दिनराति केतकी की भावै भाँति,
जिय में बसति जाति नैननि में नलिनी ।
माधवो को पीवै मधु सूझत न अंध कहँ,
सेबती सेवन कही सेई गंधफलिनी ।
और हौ कहति बात कान्ह काहे कों लजात,
ऐसे तौ खिस्याइ सो जु होइ मनमलिनी ।
देखौ नहीं प्रानपति निर्लज्ज अली की गति,
मालती सों मिल्यो चाहै लियें साथ अलिनी ।२२।
शब्दार्थ—केतकी = केवड़ा । भाँति = रंगढंग । जाति = जाती, चमेली ।
नलिनी=कमलिनी । सेवती = सफेद गुलाब । गंधफलिनी = गंधफली, चंपे की
कली ( मिलाइए—एतस्य कलिका गंधफली स्यादथ केसरे-अमरकोश, २।६४,
गंधः फलं साध्यमस्याः-व्याख्यासुधा । प्रियंगौ स्त्री गन्धफली चम्पकस्य च
कोरके-रुद्रः ) । गंधफली प्रियंगु ( काकुनी ) और चंपे की कली दोनो को
कहते हैं, चंपे की कली को गंधफली इसलिए कहते हैं कि उसमें सुगंध ही फल
होता है । प्रानपति = प्यारे स्वामी ( मालिक ) ।
२२—भावै-भरै । भाँति-बास । पीवै-पिये । कहँ-कछू, कहूँ । कही-
चाहि । औरै-ओर, औरौ । देखौ०-देखहु धौं । लिये साथ-लीने संग ।