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सर्वकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

पृष्ठ 499, कुल 584 में से

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पृष्ठ 499

भाषाटीकासहित । ( ४७३ )
आनीतं तत्क्षणादाजमनुपानं सुखावहम् ।
वातरक्तं शीतपित्तं हिक्कां च दारुणां जयेत् ॥ ३९ ॥
ज्वरान्सर्वान्वातरोगान्पांडुं कण्डूञ्च कामलाम् ।
श्रीमद्गहननाथेन निर्मितो बहुयत्नतः ॥ ४० ॥
जबतक कि पात्रकी तली अच्छे प्रकारसे लाल न होजाय तब-
तक पकावे । जब पाक समाप्त होजाय तब शीतल होनेपर इसका चूर्ण
करके दो रत्ती परिमाण लेकर घृत और सहतमें मिलाकर लोहेकी खर-
लमें डालकर लोहेके डंडेसे खरल करे । इसको नित्य भक्षण करे ।
इससे सब प्रकारके कुष्ठ रोग नष्ट होकर बलकी वृद्धि होती है ।
इस औषधिके सेवन करनेके अंतमें सरोवरका शीतल जल, अथवा
शृत शीतल दूधको पीवे । अथवा तत्काल बनाया हुआ बकरेका
मांस भक्षण करे । इस औषधिके सेवन करनेसे वातरक्त, शीत-
पित्त, दारुण हिक्का, सब प्रकारका ज्वर, वातरोग, पाण्डुरोग, कण्डू