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सर्वकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

पृष्ठ 445, कुल 584 में से

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पृष्ठ 445

भाषाटीकासहित । (४१९)
कार्पासबीजं रजनीचूर्णं भाव्यञ्च वह्निना ।
विंशतिधा विशोष्याथ लिह्याच्च मधुना सह ॥
माषमात्रं हरेन्मेहं मेघनादरसो महान् ॥ २० ॥
रससिन्दूर, कान्तलोहभस्म, अभ्रक, शिलाजीत, सोनामाखीभस्म,
मैनाशल, सोंठ, पीपल, कालीमिरच, हरड़, बहेड़ा, आमला, अंकोलकी
जड़, जीरा, कपासके बीज और हल्दी इन सब औषधियोंको एकत्र
पीसकर चित्रककी जड़के रसमें बीस वार भावना देवे । इसमेंसे एक
मासा परिमाण औषधि लेकर सहतमें मिलाकर चाटनेसे मेहरोग नष्ट
होता है । इसको मेघनाद रस कहते हैं ॥ १९ ॥ २० ॥
चन्द्रप्रभा वटी ।
मृतसूताभ्रकं लोहं नागं वङ्गं समं समम् ।
एलाबीजं लवङ्गञ्च जातीकोषफलं तथा ॥ २१ ॥
मधूकं मधुयष्टिश्च धात्री च समशर्करा ।
कर्पूरं खादिरं सारं शताह्वा कण्टकारिका ॥ २२ ॥
अम्लवेतसकं तुल्यं दिनैकं लाङ्गलीद्रवैः ।
भावयेन्मेषदुग्धेन नागवल्लया रसैर्दिनम् ॥ २३ ॥
वटिका बदरास्थ्याभा कार्या चन्द्रप्रभा परा ।
भक्षयेद्वटिकामेकां सर्वमेहकुलान्तिकाम् ॥ २४ ॥
धात्रीपटोलपत्रं वा कषायं वामृतायुतम् ।
सक्षौद्रं भक्षयेच्चानु सर्वमेहप्रशान्तये ॥ २५ ॥
रससिन्दूर, अभ्रकभस्म, लोहाभस्म, सीसाभस्म, वंगभस्म, इला-
यची, लौंग, जावित्री, जायफल, महुवेके फूल, मुलैठी, आमले,
मिश्री, कपूर, खैरसार, सौंफ, कटेरी और अमलवेत इन सब औष-
धियोंको समान भाग लेकर कलिहारीकी जड़के रसमें एक दिन, भेड़के