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सर्वकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

पृष्ठ 411, कुल 584 में से

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पृष्ठ 411

भाषाटीकासहित । ( ३६५ )
मिलाकर अदरखके रसमें एक दिन खरल करके चनेकी बराबर गोली
बना लेवे । प्रतिदिन प्रातःकाल, मध्याह्नके समय और रात्रिके समय
एक एक करके तीन गोली भक्षण करे । ऊपरसे उड़द, इख, पिष्टक
( पक्वान्न ), भारी पदार्थ और गोदूध सेवन करे । यह औषधि वात-
शूलसे पीड़ित रोगीके लिये अतीव हितकारी है । इसको पञ्चात्मक
रस कहते हैं ॥ ११-१५ ॥
धात्रीलोह ।
कुडवं शुद्धमण्डूरं यवञ्च कुडवन्तथा ।
पाकार्थञ्च जलं प्रस्थं चतुर्भागावशेषितम् ॥ १६ ॥
शतावरीरसस्याष्टावामलक्या रसस्य च ।
तथा दधि पयो भूमिकूष्माण्डस्य चतुःपलम् ॥ १७॥
चतुःपलमिक्षुरसं दद्यात्तत्र विचक्षणः ।
प्रक्षिपेज्जीरकं धान्यं त्रिजातं कारिपिप्पली ॥ १८ ॥
मुस्तं हरीतकी चैव अभ्रं लौहं कटुत्रयम् ।
रेणुका त्रिफला चैव तालीशं स्वर्णकेशरम् ॥ १९ ॥
कटुकं मधुकं रास्ना चाश्वगन्धा च चन्दनम् ।
एतेषां कार्षिकं भाग चूर्णयित्वा विनिःक्षिपेत् ॥२०॥
शुद्ध मण्डूर एक कुड़व परिमाण और जौ एक कुड़व परिमाण ले
दोनोंको एकत्र कर आठगुने जलम पकावे । जब पकते पकते जल
चौथाई भाग बाकी रहजाय तब उतारकर छान लेवे । फिर इस क्वाथमें
सतावरका रस आठ पल, आमलोंका रस आठ पल, दही आठ पल,
दूध आठ पल, विदारीकंद ४ पल और ईखका रस ४ पल डालकर
मंद मंद अग्निसे पकावे । जब पाक होजाय तब जीरा, धनियां, दाल-
चीनी, इलायची, तेजपात, गजपापल, नागरमोथा, हरड़, अभ्रक-
भस्म, लोहभस्म, सोंठ, मिरच, पीपल, रेणुका, हरड़, बहेड़ा, आमला,