रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ७८ ) रसेन्द्रसारसंग्रह ।
लोहशोधन विधि ।
तप्तानि सर्वलोहानि कदलीमूलवारिणि ।
सप्तधा त्वभिषिक्तानि शुद्धिमायान्त्यनुत्तमाम्॥५॥
लोहेके पत्र बनाकर तीक्ष्ण अग्निमें तपाकर लाल होनेपर केलाकंदके
रसमें बुझावे, ऐसे तपा तपा कर सात वार बुझानेसे सब प्रकारके लोहे
अनुपम ( जिसकी बराबर और शुद्धि नहीं ऐसे ) शुद्ध होजाते हैं॥५॥
त्रिफलाष्टगुणे तोये त्रिफला षोडशं पलम् ।
तत्क्वाथे पादशेषे तु लोहस्य पलपञ्चकम् ॥ ६ ॥
कृत्वा च तप्तपत्राणि सप्तवारं निषेचयेत् ।
एवं प्रलीयते दोषो गिरिजे लोहसम्भवः ॥ ७ ॥
दूसरी विधि—सोलह सोलह पल त्रिफला लेकर उसमें आठ आठ गुना
पानी डालकर पकावे, जब चौथा भाग शेष रहे तो उतारकर छान ले इस
क्वाथमें पांच पल लोहपत्रोंको तपा तपा कर सात वार बुझावे तो खानसे
उत्पन्न होनेका सब दोष दूर होकर लोहा शुद्ध हो जाता है ॥ ६ ॥ ७ ॥
लोहमारणविधि ।
भानुपाकात्तथा स्थालीपाकाच्च पुटपाकतः ।
निरुत्थो जायते लोहो यथोक्तफलदो भवेत् ॥ ८ ॥
आगे लिखे भानुपाक, स्थालीपाक और पुटपाक करनेसे लोहकी
निरुत्थ भस्म होजाती है,यह भस्म उत्तम फलके देनेवाली होती है ॥८॥
भानुपाकविधि ।
लौहे दृषदि लोहञ्च मुद्गरेण हतं मुहुः ।
कृत्वा तु गलितं शुद्धं जलेन त्रैफलेन च ॥ ९ ॥
क्षालयेद्बहुशः पश्चात्कृत्वा द्रव्यान्तरं पृथक् ।
शोषितं भानुभिर्भानोर्भानुपाके प्रयोजयेत् ॥३१०॥