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सर्वकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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पृष्ठ 67

द्वितीयस्तरङ्गः २५
वसुसंख्योन्मिताभिश्च रक्तिकाभिस्तु माषकः ।
माषकैः रविसंख्यातैस्तोलकं परिकीर्तितम् ॥६२॥
वटकः क्षुद्रकश्चैव द्रंक्षणश्च प्रकीर्तितः ।
तोलकद्वितयेनेह कर्षः स्यात्सैव तिन्दुकः ॥६३॥
अक्षः स एव कथितो विडालपदकं तथा ।
कवलग्रहसंज्ञश्च सुवर्णश्च निगद्यते ॥६४॥
कर्षद्वयं त्वर्द्धपलं स्याच्छुक्तिश्च निगद्यते ।
मता चाष्टमिका सैव पलार्द्धञ्च प्रकीर्तितम् ॥६५॥
शुक्तिभ्यान्तु पलं ज्ञेयं मुष्टिः षोडशिका च सा ।
चतुर्थिका च बिल्वञ्च प्रकुञ्चश्च निगद्यते ॥६६॥
पलाभ्यां प्रसृतं ज्ञेयं प्रसृतिश्च निगद्यते ।
प्रसृतिभ्यां समाख्यातः कुडवश्चाञ्जलिः स्मृतः ॥६७॥
कुडवाभ्यां शरावः स्यात् मानिका च निगद्यते ।
तदेवाष्टपलं ख्यातं रसतन्त्रे विचक्षणैः ॥६८॥
दशभिश्च पलैरत्र सेरस्त्वाधुनिकः स्मृतः ।
अशीतितोलकमितः स एव सेरकः स्मृतः ॥६९॥
अथ मानपरिभाषा—योगान् मृत्युञ्जयरसप्रभृतीन् । वसुसंख्या अष्टमिता,
“अष्टौ वसव” इति स्मरणात् । रविसंख्यातैः द्वादशभिः । सैव तिन्दुक इत्यत्र
सन्धिः “सैष दाशरथी रामः” इतिवत् । दशभिश्च पलैरिति पलस्याष्टतोलकमि-
तत्त्वात् । आधुनिकः वर्त्तमाने प्रचलितः ॥ ६०–६६ ॥
भा.टी.—वैद्य को किसी योग को बनाने के पूर्व मान (तौल) का ज्ञान
करना अत्यन्त आवश्यक है । अतएव योगनिर्माण में सफलता और सरलता
प्राप्त करने के लिए मानपरिभाषा लिखी जाती है । छः सफेद सरसों के बरा-
बर एक जौ का मान होता है । तीन यव की एक गुञ्जा या रत्ती होती है ।
आठ रत्तियों का एक मासा होता है । और बारह मासे का एक तोला होता
है । इसी तोले को संस्कृत में वटक, क्षुद्रक और द्रंक्षण भी कहते हैं । दो
तोले को एक कर्ष होता है । इसी कर्ष का तिन्दुक, अक्ष, विडालपदक, कव-
लग्रह तथा सुवर्ण भी कहते हैं । दो कर्ष अर्थात् चार तोले को अर्धपल, शुक्ति,
अष्टमिका और पलार्द्ध भी कहते हैं । दो शुक्ति अर्थात् आठ तोले को एक
पल, मुष्टि, षोंडिका, चतुर्थिका, बिल्व और प्रकुञ्च भी कहते हैं । दो पल