रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)
Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary
शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा
पृष्ठ 500, कुल 558 में से
संदर्भ में पढ़ें। स उच्यते ।"
Wait, look at the last line:
"यस्तु तमखल्लः स उच्यते ।" "
Wait, the word "तमखल्लः":
Look at it: "तमखल्लः" or "तमखल्लः,"?
It's "तमखल्लः स उच्यते ।"
And there is a closing quote: ।"
Wait, look at "द्वादशांगुलविस्तारः":
Is it "द्वादशांगुलविस्तारः" or "द्वादशाङ्गुलविस्तारः"?
In line R20:
"द्वादशांगुलविस्तारः" (it has an anusvara on 'शा': 'द्वादशांगुलविस्तारः').
Wait, look at 'खल्लो':
'ख', 'ल्लो' -> 'खल्लो'.
Line R21:
'भवति वर्तुलः ।' (or 'वर्त्तुलः'? It has double त: 'वर्त्तुलः' or single 'वर्तुलः'? It looks like 'वर्त्तुलः' with a horizontal stroke across 'त', very common in 19th/early 20th century print). Let's look at 'वर्तुलः': 'व', 'र्', 'तु' or 'त्तु'? It looks like 'वर्तुलः' or 'वर्त्तुलः'.
Then: 'लोहेनिर्मितो' or '