रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)
Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary
शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा
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chholá, Hindi chanakloni )
६४
चण्ड ( A fierce god, who is called
भूतकालान्तक or destroyer of
elements or existing beings)
४३६
चण्डाजी ( लिङ्गिनीलता according
to राजनिघण्टु, but भूम्या-
मलकी according to रसकाम-
धेनु ) ५८
चण्डालीकन्द (= चण्डालकन्द, known
as chandálsák ) ३३३
चन्दन ( Santalum Album,
Linn. ) ६
चन्द्र (=तार = Silver ) २७०, ४२७
चन्द्रतोय ( See चन्द्रोदक ) २३२
चन्द्रवल्ली (=सोमलता according
to राजनिघण्टु, but वाकुची
and सोमा according to रस-
कामधेनु ) ३४२
चन्द्रहेम ( The amalgam of silver
and gold ) २०६
चन्द्रार्क ( The amalgam of silver
and copper. "भागाः षोडश
तारस्य ताम्रस्य द्वादशैकया।
आवत्तितास्तु चन्द्रार्कं वर्णोत्कषे-
करद्वयम् ।"—(रसकामधेनु) २८६,
३०८ &c.
चन्द्रार्कपत्र ( Plates of silver and
copper alloyed together )
१३६, २२३
चन्द्रार्कादि ( The moon, the sun
and the rest ) ४३४
चन्द्रोदक (Moon-water or rather,
fullmoon-water) (Definition-
of ) २३१, ( Effect of ) २३३
चपल ( One sort of महारस,
"(ईश्वरस्य) माक्षिकं कर्पूरजमलं
सौवीराद्यं च नेत्रजम् । नागा-
मलं तु चपलं मलं देहस्य टङ्क-
णम् ॥” “नानाविधं विजानीयात्
चपलाख्यं महारसम् । नाग-
तारविशस्वर्णवज्रतीक्ष्णादिपूर्व-
कम् ॥” “त्रिंशत्पलमितं नागं
भानुदुग्धेन मर्दितम् । विमर्द्य
पुटयेत्तावत् यावत् कर्षावशि-
ष्टम् । न तत् पुटसहस्रेण क्षय-
मायाति सर्वथा । चपलोऽयं
समाख्यातो वार्तिकैर्नागसम्भवः ॥
इत्थं हि चपलः कार्यो वज्र-