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सर्वकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

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पृष्ठ 447

ते ॥ १५२ ॥"
Wait, in the image, is it "मज्जग्नो" or "मज्जाग्नो"?
Wait, look at line 4:
वे धे [space] तु² [space] हे म वि म ले [space] म ज्ज ग्‍नो³ [space] हे म [space] प्र जा य ते ॥ १५२ ॥
Yes, "मज्जग्नो³".

  1. Structure the lines:
    Let's map every visible line on the page to , , etc.
    Line 1: ४२४ [space] रसार्णवे
    Line 2: अस्थिवेधेन देवेशि तीक्ष्णं कनकत्तां व्रजेत् ।
    Line 3: मज्जवेधो¹ वरारोहे लोहान्यष्टौ च वेधयेत् ॥ १५१ ॥
    Line 4: कवचस्य तु वेधेन मृन्मयं काञ्चनं भवेत् ।
    Line 5: वेधे तु² हेमविमले मज्जग्नो³ हेम प्रजायते ॥ १५२ ॥
    Line 6: तारे⁴ मांसं सुरेणानि जीर्णसूतस्य वेधयेत् ।
    Line 7: अलके⁵ विमले ताप्ये तीक्ष्णे तारे च⁶ भास्करे ॥ १५३ ॥
    Line 8: क्रामणे तु भवेत्तक्रं शर्करा माक्षिकं तथा ।
    Line 9: