सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 307, कुल 558 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 307

२८४ रसाणर्वे
दशसंकलिकाबद्धः शब्दवेधी महारसः ।
यथा लोहे तथा देहे क्रमते नात्र संशयः¹ ॥ १८ ॥
वेधयेत्तत्प्रमाणेण धातुश्चैव² शरीरकम् ।
कारयेद्गुटिकां³ दिव्यां बदरास्थि⁴प्रमाणतः ॥ १६ ॥
महाकालीं पूजयित्वा⁵ धारयेत् सततं बुधः⁶ ।
तस्य⁷ मन्त्रं प्रवक्ष्यामि त्रिदशैरपि दुर्लभम्⁸ ॥ २० ॥
प्रणवो भुवनेशीबीजं⁹ लक्ष्मीबीजं ततः परम्¹⁰ ॥ २१ ॥
ॐ ह्रीं श्रीं कालिका¹¹कालि महाकालि मांसशोणितभोजिनि¹²।
क्रीं क्रीं हुं¹³ रक्तकृशमुखि देवि¹⁴ रससिद्धिं प्रदत्स्व¹⁵ मे ॥२२॥
(1) क्रमेन्नात्र न संशयः, a variant in D, which is partly correct. (2)
D reads धातु चैक. K reads धातु चैव. (3) B reads घटिकां, which
is not correct. (4) K reads वदर्यास्थि, which is incorrect. (5)
K reads तु after पूजयित्वा ; but it is redundant. (6) Both D and
K read बुधैः, which is grammatically incorrect. (7) K reads
तस्या. (8) This hemistich is not found in D. (9) प्रणवं बीज-
षड्क्य, a variant in B. D wants this hemistich. प्रणवभुवनेशीनील, a
variant in K. (10) B reads पुनः. K reads लक्ष्मोः बीज, which is
not correct. (11) The word कालिका is not found in B. (12)
B reads भोजिनौ, which is incorrect. D has an incomplete charana
मांसशोचितने. K reads भाजनं. (13) D has क्रीं क्र क्रीं. K has क्रीं क्रीं
हुं हुं. (14) रक्तकृशमुखो देवी, a reading in B. रक्तकृष्यामुखितकेन्दौ,
a reading in D. रक्तकृष्णामुखि देवि, a reading in K. (15) K reads
रससिद्धिर्ददस्व, which is incorrect.