रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)
Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary
शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७० रसार्णवे
कान्तहेमरविचन्द्रमभ्रकं¹
गोलकं निहितमिङ्गुदीफले² ।
शैलवारिवरसिद्धगोलकं
सुन्दरं ह्यमररञ्जकं शुभम्³ ॥ ३६६ ॥
कान्तहेमरविचन्द्रमभ्रकं
वज्ररत्नमहिराज⁴गोलकम् ।
क्षिप्तमामलककाष्ठकोटरे⁵
भूमिभैलनिहितं समुद्धृतम्⁶ ।
शैलतां गतमथाहितं मुखे
वज्रकायकरमल्प⁷वासरैः ॥ ३७० ॥
ताल⁸हेमवरशुल्व सूतकैः
गोलकं वरणकाष्ठयन्त्रितम्⁹ ।
शैलवारिकृतसुन्दरीरसं¹⁰
खेचरीति गुटिका¹¹ निगद्यते ॥ ३७१ ॥
(1) This śloka (369) is not found in K. M reads मभ्रकै, which seems to be incorrect.
(2) M reads निहितङ्किङ्गुदीफलैः, which is incorrect.
(3) M reads शुभः, which seems to be incorrect.
(4) M reads सहकार.
(5) क्षिप्तमामलककाष्टकोटरे, an incorrect variant in M.
(6) M reads भूमिभैलमहित. K reads समुधृतं, which is incorrect.
(7) M reads कल्प, which is incorrect.
(8) M reads सार.
(9) K reads चरण, which seems to be incorrect. M reads यन्त्रिरैः.
(10) K reads रसः, which is grammatically incorrect.
(11) M reads वटिका.