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सर्वकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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३६८ रसार्णवे
षोड़शे वत्सरे देवि¹ दिव्यरूपः स² जायते ॥ ३६३ ॥
शतपलमभयानामक्षधात्रोस्तथैव³
कथितजलशताष्टी⁴ भागमष्टावशेषम् ।
घृतमधुसितयाक्तं⁵ व्योषचित्रं दशांशं
रसफलरससिद्धं लोहजीर्णे मृतञ्च⁶ ॥ ३६४ ॥
गिरिजतुसममभ्रं⁷ कान्तभृङ्गं विड़ङ्गं
रससहितसुभाव्यं तण्डुलैर्दिव्यमुख्यैः⁸ ।
अहिममरकतकल्कं⁹ लोह¹⁰पात्रस्थमाषं
त्रिदिनतनुसुसिद्धं¹¹ कल्कमेतद्धरिष्ठम्¹² ॥ ३६५ ॥
लिहति शयनकाले¹³ वामनेत्रावसेवी¹⁴


(1) M reads दिव्यं, which seems to be incorrect. (2) M has
दिव्यभूपन्. (3) K reads incompletely मक्षधात्र्यास्तु. M reads अक्ष-
धान्योस्तथैव. Both seem to be incorrect. (4) कथितजलशतष्टा,
a variant in M, which is not correct. (5) घृतमधुसितयं, an incor-
rect reading in K. (6) K reads लोहजीर्णे सुतेश्च, wherein the last
term is unintelligible. (7) M reads incorrectly गिरियससमसंभू.
(8) K reads मुनैः, which is incorrect. M reads तण्डुलैर्विल्वमञ्जा, (विल्व-
मस्थ्यैः ?). (9) अहिमसुतसुकल्कं, a variant in K. अभ्रमरकतकल्क, a
variant in M. (10) M reads हेम. (11) K has दिनतनु
सुसिद्धं. M has त्रिदिनतनु गुक्त. Both are incomplete. (12) K has
कल्कमेतं वविष्टं, which seems to be incorrect. (13) M reads शिशिर-
कालि. (14) K reads वसेवि, which is incorrect. M reads वामने-
तर्बसेवि, which is also incorrect.