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सर्वकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

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पृष्ठ 260

द्वादशः पटलः । २३७
विष्टरा¹मुद्रया तां तु स्थानयोगं नियोजयेत्² ॥ २१० ॥
कञ्चुकी तु शिला क्रान्ता³ कुमारी वज्रकन्दकम्⁴ ।
योषिद्रक्तं गवां मूत्रं⁵ तिलकः सर्व्ववश्यकृत्⁶ ॥ २११ ॥
अथातः संप्रवक्ष्यामि विषोद⁷रसबन्धनम् ॥ २१२ ॥
विषोदकं विषसमं घृतवच्च घृतोदकम्⁸ ।
सितपीतादिवर्णाख्यं⁹ तच्च देवि रमोत्तमम् ॥ २१३ ॥
तत्र गत्वा वनोद्देशे¹⁰ स्नूहेडोरसहस्रकम्¹¹ ।
केशाः छिन्नाः स्फुटन्त्यस्मिन्¹² आत्म¹³च्छाया न दृश्यते॥२१४॥
(1) B reads विष्टुरा. K reads निष्टया. M reads त्रिपुरा. (2)
स्थानयोगेन योजयेत्, a variant in D. K has an incomplete charaṇa स्या
योजयेत. (3) B reads कुंचुके, which is incorrect. M reads तुन्दिला
क्रान्ता. (4) D reads कचकन्दकम्. (5) योषिद्रक्तं तु गोरक्त, a vari-
ant in B. योषिद्रक्तञ्चन्द्रोदकं, a variant in M. (6) In B we hav ·
this absurd reading—मर्दन संवधये देवो देहलोहचैवोद्वातो रसवंधनं. Here ends
the 12th Paṭala of the MS. .B. व्याख्या स्याद्रमवत्सकम्, a variant in M.
(7) D reads विषोकदस्य वन्धनम्, which seems to be incorrect. K reads
विषोदकरसबन्धनम्, wherein क is redundant. (8) This hemistich
is not found in M. (9) सीसयान्तादिवर्णैखं, an incorrect variant
in D. K reads वर्णापि, which is incorrect. (10) D reads तवो
द्देशं. K reads वनोदेश, which is incorrect. M reads भवेद्देशे, which is
also incorrect. (11) स्नूर क्षीरं सहस्रकं, a variant in D. स्नूरेर्द्वारं
सहस्रकं, an incorrect variant in K. (12) D reads केशाः चिप्र .
K reads कोशाः भिन्ना स्फुटर्य्यक्षि, which is incorrect. M reads कोषच्छिन्नाक्
स्फटंतेस्मिन्, which is also incorrect. (13) M reads नाव.