सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 163, कुल 558 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 163

१४० रसार्णवे
पाचितं गालितं चैतत् सारणा¹तैलमुच्यते ॥ ८५ ॥
रसतुल्यं यथा बीजं² गतं गर्भद्रुतिं³ प्रिये ।
व्यापकत्वेन सर्व्वे⁴ च समभागास्तथेष्यते ॥ ८६ ॥
पक्वं श्रेष्ठं समं गर्भे यद्भवेद्द्रञ्जयेच्च तम्⁵ ॥ ८७ ॥
एवमुक्तानि बीजानि जारयेद्धिङ्ग⁶योगतः ।
तन्ममाचक्ष्व देवेशि⁷ किमन्यच्छ्रोतुमिच्छसि ॥ ८८ ॥
इति श्रीपार्वतीपरमेश्वरसंवादे⁸
रसार्णवे रससंहितायां
बीजसाधनो⁹ नाम
अष्टमः पटलः ॥८॥

(1) M reads सारणं. (2) K reads यदा बीजं. (3) M reads
गर्भद्रुति, which is incorrect. (4) व्येषतर्केण सर्वत्र, a variant in M,
which is not intelligible. (5) यद्भवेद्द्रञ्जयेशे, a variant in M, wherein
the first term is inc. (6) K reads जारयेद्वीज, which is incorrect.
(7) This charaṇa is not found in M. (8) This portion is not
found in M. (9) K and M read बीजसाधनं ; but as it qualifies
पटलः, which is in masculine gender, it ought to be also in the same
gender. The neuter gender may be supported by the rule of विधेय-
विशेषण. But in order to keep up the uniformity we have adopted the
masculine gender.