झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलक्ष्मीबाई ४४७
बखतवली को अङ्गरेज़ो ने कैद करके लाहौर भेज दिया । मर्दनसिंह भी
कैद हो गया ।
रोज़ को कालपी में पेशवा की बहुत बहुमूल्य युद्ध सामग्री मिली ।
पन्द्रह तोपे, सातसौ मन बारूद, असंख्य बन्दूक और तलवारें और नये
तर्ज़ के हथियार ढालने-बनाने की विलायती मशीने हाथ लगी । रोज़ को
यह विजय चौबीस मई के दिन मिली । यही दिवस विक्टोरिया के जन्म
का था । इसलिये अङ्गरेज़ो ने धूमधाम के साथ कालपी पर अपना झण्डा
चढ़ाया और कतल तथा लूट से पाई हुई शकर के प्रमाद से जश्न
मनाये । और तीन दिन कालपी को मुस्तैदी के साथ लूटा ।
जनरल रोज़ ने नर्मदा के उत्तर भाग को कालपी तक अपने अधीन
कर लिया । नर्मदा के उत्तरपूर्वीय भाग को दबाता हुआ करवी, महोबा,
वादा इत्यादि को लूटता-कुचलता विटलाक रोज़ से कालपी में आ मिला ।
राजपूताने की ओर से कर्नल स्मिथ अपनी सेना लिये हुये आगरा,
ग्वालियर की दिशा में आ रहा था । 'बलवाइयो' के पकड़े जाने के लिये
गाव गाव में इनामी इसतहार बांटे जा रहे थे ।
रावसाहब के पास रईस और सरदार काफी थे, परन्तु सेना बहुत
कम थी । तोपें नही थी, सामान नही बचा था । और व्यवस्था तो कभी
भी न थी ।
दिन भर लू चली । रात को भी काफी गरम हवा चल रही थी
तारे धूल की पतली चादर से ढके हुये थे । गोपालपुरा के एक बगीचे में
रावसाहब, तात्या, वादा के नवाव इत्यादि आगे की योजना के आकार-
प्रकार बना-विगाड रहे थे । रात अन्धेरी थी । पास में कोई उजाला न
था । इसलिये किसके चेहरे पर क्या गुज़र रही थी, कोई नही देख
सकता था ।
रानी लक्ष्मीबाई अपने शिविर में थी । उस दरबार में न थी ।
रावसाहब ने कहा, 'किसी प्रकार नागपूर की ओर पहुच पावें तो
शीघ्र सैन्य संग्रह हो । इन्दौर की छावनी से भी सहायता मिले ।'