झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलक्ष्मीबाई १७१
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अङ्गरेजी क्लब घर के सामने वाले मैदान की दूबा साफ कराई जा
रही थी। धूप में मजदूर हाँफ हाँफ कर काम कर रहे थे । मजदूरो का
मुखिया खडे खडे काम का ढग बतला रहा था ।
एलिस चाहता था काम ज्यादा जल्दी हो । सन्ध्या के पहले ही
कमिश्नर स्कीन, डिप्टी-कमिश्नर गार्डन और फौजी अफसर कप्तान डनलप
इत्यादि की बैठक होनी थी । कुछ फल-फलारी की भी योजना थी ।
झाँसी को कमिश्नरी शासन का गौरव प्राप्त हुआ । इसमें कई जिले
शामिल कर दिये गये । झाँसी का एक अलग जिला बना । इस झाँसी
जिले का पहला डिप्टी-कमिश्नर कप्तान गार्डन हुआ, जो गंगाधरराव को
चिरौरी किया करता था ।
मैदान की सफाई करने वाले मजदूर जरा ढीले पड पड जा रहे थे ।
एलिस को क्षोभ हुआ । उसने मजदूरो के मुखिया को डांटा ।
मुखिया ने कहा 'ये मुफ्तखोर हैं हुजूर । डर के मारे मैंने अभी तक
इनकी मारपीट नही की । अब हड्डी-पसली तोडता हू ।'
एलिस बोला, 'मैं इस समय हड्डी-पसली तोडना पसन्द नही करता,
मगर इनसे काम लो । काफी पैसा दिया जाता है । जब रियासत थी तब
तो इनको मुफ्त में काम करना पडता था ।'
एलिस बगले में चला गया । मुखिया ने सोचा, 'रियासत में काम
मुफ्त में करते थे तो रियायते भी बहुत पाये हुये थे । लडकी-लडके के
व्याह के समय, देखें अब कौन इन लोगो की मदद करता है ।'
चिल्लाकर मजदूरो को काम करने के लिये सम्बोधन करने लगा ।
पास जाकर उसने कहा 'अब, रियासत नही है अङ्गरेजी सरकार उठी
है । ठिकाने से काम करो नही तो खाल टूटती फिरेगी ।'
मजदूरो ने कुडकुडाते हुये कहा—
'न हमें रियासत जागीर लगाये थी और न अङ्गरेज लगा देंगे ।'
'जितना खोदेंगे उतना पी पायेंगे ।'