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सर्वकोश
रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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आत्म-चरित्र 29
भोजन कभी न खाए। सात्विक भोजन करे। शुष्क भोजन का भी त्याग करे। जहाँ
तक हो साग-सब्जी अधिक खाए। भोजन खूब चबा-चबा कर करे। अधिक गरम
या अधिक् ठंडा भोजन भी वर्जित है। स्कूल अथवा कालिज से आकर थोड़ा-सा
आराम करके एक घंटा लिखने का काम करके खेलने के लिए जाए। मैदान में
थोड़ा-सा घूमे भी। घूमने के लिए चौक बाजार की गंदी हवा में जाना ठीक नहीं।
स्वच्छ वायु का सेवन करे। संध्या समय भी शौच अवश्य जाए। थोड़ा-सा ध्यान
करके हल्का-सा भोजन कर ले। रात्रि के समय साढ़े दस बजे तक पठन-पाठन
करे और फिर सो जाए। सदैव खुली हवा में सोना चाहिए। बहुत मुलायम और
चिकने बिस्तर पर न सोए। अधिक पाठ न करना हो तो साढ़े नौ या दस बजे
सो जाए। प्रातःकाल साढ़े तीन या चार बजे उठकर कुल्ला करके शीतल जलपान
करे और शौच से निवृत्त हो पठन-पाठन करे। सूर्योदय के निकट फिर नित्य की
भाँति व्यायाम या भ्रमण करे। सब व्यायामों में दंड-बैठक सर्वोत्तम है। जहाँ जी
चाहे, व्यायाम कर लो। यदि हो सके तो प्रोफेसर राममूर्ति की विधि से दंड-बैठक
करे। प्रोफेसर साहब की रीति विद्यार्थियों के लिए लाभदायक है। थोड़े समय में ही
पर्याप्त परिश्रम हो जाता है। दंड-बैठक के अलावा शीर्षासन और पद्मासन का
भी अभ्यास करना चाहिए और अपने कमरे में वीरों और महात्माओं के चित्र
रखने चाहिएँ।