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रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished1,049 पृष्ठ

पृष्ठ 929, कुल 1049 में से

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पृष्ठ 929

then space then "हेगेन" (Copenhagen = Kopenhagen).

Line 31:
"भारत और भारतीय संस्कृति में उसका स्थान' में लिखा है कि महाभारत का मूल कोई पौराणिक गाथा रही होगी ।"

Line 32:
"उसकी एकता से उसका रचयिता कोई एक ही व्यक्ति रहा होगा । उसमें परस्परविरोधी सिद्धान्त, पुनरुक्ति और बिना"

Line 33:
"प्रसङ्ग की बातें नहीं आनी चाहिये । अतः ऐसे अंशों को प्रक्षिप्त ही मानना चाहिए । इस कसौटी पर उन्हें सात-आठ"

Line 34:
"हजार श्लोकों से अधिक नहीं मिले जिनको उपलब्ध महाभारत का मूल कहा जा सके ।"

Let's do a final review of each line against the image:
Top header:
८५२ रामायणमीमांसा द्वाविंश

Heading:
महाभारत और पाश्चात्य विद्वान्

Text:
महाभारत के आलोचनात्मक अध्ययन की ओर सर्वप्रथम क्रिश्चियन लासेन का ध्यान गया । सन् १८३७
Wait, let's look at the year again in :
Is it १७७३ or १८३७?
Look at:
First digit: १
Second digit: look at ८ in १८४२ (L5) vs this digit.
Wait, let's compare:
In L5: १८४२ -> the second digit has a top loop, bottom loop.
In L8: १८८४ -> the second and third digits are clearly ८.
In L8: