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रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished1,049 पृष्ठ

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पृष्ठ 668

अध्याय उत्तरकाण्ड ५९१
तिब्बती तथा खोतानी रामायण, हिन्देशिया के सेरीराम तथा सेरतकाण्ड, श्याम के रामकियेन में रावण-
चरित का कुछ वर्णन भूमिका में ही रखा गया है ।
काश्मीरीरामायण में प्रस्तुत रावणचरित की सामग्री सुन्दरकाण्ड के अन्तर्गत रखी गयी है। सुन्दरकाण्ड
में लङ्का में सीता की खोज करते हुए हनुमान् रावण का वर्णन नारद से सुनते हैं ।
बुल्के कहते हैं कि रावण के चरित के सम्बन्ध में प्रामाणिक काण्ड मौन हैं, परन्तु उनकी यह भ्रान्ति है।
बाल और उत्तर दोनों ही प्रामाणिक काण्ड हैं। बुल्के के तथाकथित प्रामाणिक काण्ड में यदि रावणचरित होता भी
तो उसे प्रक्षेप कहने में उन्हें क्या कठिनाई होती ?
वाल्मीकिरामायण के अनुसार शूर्पणखा रावण की बहन है। कुम्भकर्ण और विभीषण दो भाइयों के
अतिरिक्त तीसरे भाई खर का भी उल्लेख है जिसका सेनापति दूषण था। दाक्षिणात्य पाठ के अनुसार रावण की माता
कैकसी थी। अन्य पाठों के अनुसार रावण की माता का नाम निकषा है। (वाल्मीकिरामायण गो० पा० ५।७६;
प० पा० ५।७५) तथा भागवत (७।१।४३) में उसे केशिन कहा गया है ।
बुल्के कहते हैं युद्धकाण्ड में रावण को क्षत्रिय उपाधि दी गयी है (वा० रा० ६।१०९।१९)। परन्तु यह
ठीक नहीं, क्योंकि रावण जन्मतः ब्राह्मण है। युद्ध प्रधानरूप से क्षत्रिय-धर्म है। क्षत्रधर्म में प्रतिष्ठित होने के कारण ही
उसे क्षत्रिय कहा गया है—
"नैवं विनष्टाः शोच्यन्ते क्षत्रधर्मव्यवस्थिताः ।
वृद्धिमाशंसमाना ये निपतन्ति रणाजिरे ॥"
क्षत्रधर्म में व्यवस्थित रणनिहत क्षत्रिय शोचनीय नहीं होता—
"क्षत्रियो निहतः संख्ये न शोच्य इति निश्चयः।" (वा० रा० ७।१०९।१५-१८)
वे यह भी कहते हैं कि राम-कथा के विकास के साथ-साथ रावण का महत्त्व भी बढ़ने लगा था। जिससे
उत्तरकाण्ड की रचना के समय तक रावण को ब्रह्मा का वंशज माना गया है। यह भी बुल्के का प्रमाद ही है। मिथ्या
कल्पना को विकास कहना भी भ्रामक है। वाल्मीकिरामायण के अनुसार तो रावण ब्रह्मा के पुत्र पुलस्त्य का पौत्र एवं
विश्रवा का पुत्र है। बुल्के को बतलाना चाहिये कि रावण किसका पुत्र है ? और वह भी किस प्रमाण के बल से ?
पुराण भी रामायण के ही पक्ष को अङ्गीकार करते हैं।
प्रजापति ने जल की सृष्टि के बाद प्राणियों की सृष्टि की। उनको जल की रक्षा करने का आदेश दिया ।
उनमें से कुछ ने 'रक्षामः' कहा और कुछ ने 'यक्षामः' कहा। अतः ब्रह्मा ने क्रम से उन्हें राक्षस एवं यक्ष कह दिया
(वा० रा० ७।४।९-१२)।
राक्षसों के हेति, तथा प्रहेति दो नेता थे। हेति के पुत्र विद्युत्केश से सुकेश उत्पन्न हुआ। सुकेश के माल्यवान्,
सुमाली और माली तीन पुत्र हुए। तीनों ने तपस्या कर अमरत्व का वरदान पाया। विश्वकर्मा ने उनके लिए त्रिकूट
पर लङ्का बना दी। आनन्दरामायण के अनुसार गरुड़ एक गज, ग्राह तथा गृध्र को लेकर क्षीरसागर के स्वर्णवृक्ष पर
बैठे। उनके भार से वह शाखा टूट पड़ी। उसके नीचे ऋषि तप करते थे, अतः उस शाखा को भी लेकर गरुड़ ने
लङ्का पहुँच कर तीनों को खा लिया। तीनों की अस्थियों का ही त्रिकूट पर्वत बन गया। वह स्वर्णशाखा पाषाण बन
गयी। लङ्का-दहन के समय वह द्रवित हो गयी, अतः लङ्काभूमि स्वर्णमयी हो गयी। रंगनाथ के अनुसार वायु द्वारा
हेमाद्रि का एक हेममय शिखर उड़कर वहाँ आ पड़ा था, वही त्रिकूट हो गया। वाल्मीकिरामायण (३।३५।२७-३२)