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सर्वकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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पृष्ठ 161

८४ रामायणमीमांसा चतुर्थ
“अविन्ध्यो नाम मेधावी विद्वान् राक्षसपुङ्गवः ।
धृतिमाञ्छीलवान् वृद्धो रावणस्य सुसम्मतः ॥
रामात् क्षयमनुप्राप्तं रक्षसां प्रत्यचोदयत् ।
न च तस्य स दुष्टात्मा शृणोति वचनं हितम् ॥”
(वा० रा० ५।३६।१२,१३)
अर्थात् अविन्ध्य विद्वान्, शीलवान् तथा राक्षसों में श्रेष्ठ है। उसने ‘राम से राक्षसों का क्षय प्राप्त है’
ऐसा कहा, पर दुष्ट रावण ने उसका हित वचन नहीं सुना ।
रामोपाख्यान में त्रिजटा ने सीता को अविन्ध्य का यह सन्देश सुनाया था कि राम और सुग्रीव की मैत्री
हो गयी है। राम शीघ्र आ रहे हैं।
‘अविन्ध्यो नाम मेधावी वृद्धो राक्षसपुङ्गवः ।
स रामस्य हितान्वेषी·······” (म० भा० ३।२७०।५६)
मेघनाद के मरने पर सीता के वध के लिए उद्यत रावण को अविन्ध्य रोकता है। रामायण में सुपार्श्व
रोकता है।
युद्धकाण्ड में भी कुछ परिवर्तन हैं। जैसे—रावण की सभा में राम के मायामय सिर की उपस्थिति एवं
रावण और सुग्रीव का युद्ध आदि रामोपाख्यान में नहीं हैं।
रामोपाख्यान में सेतु-बन्धन के वृत्तान्त में समुद्र ने स्वप्न में राम को दर्शन देकर सहायता देने का वचन
दिया। वहाँ समुद्र के लिए राम के बाणप्रयोग का अभाव है।
अङ्गद का दौत्य कार्य, लङ्कावरोध, पहला शरबन्ध, द्वन्द्वयुद्ध आदि रामोपाख्यान में नहीं हैं। रामो-
पाख्यान के अनुसार कुम्भकर्ण का वध लक्ष्मण के द्वारा हुआ है। इन्द्रजित् द्वारा माया सीता की हत्या का उल्लेख
रामोपाख्यान में नहीं है। नागपाश का वृत्तान्त रामायण में दो बार वर्णित है, पर रामोपाख्यान में एक ही बार
कहा गया है। उसमें विभीषण राम और लक्ष्मण को प्रज्ञास्त्रसे स्वस्थ कर देते हैं एवं राम को कुबेर का भेजा हुआ
जल देते हैं। उस जल से आँखें धोने से राम अदृश्य प्राणियों को देख सकते हैं। हनुमान् का पर्वत से ओषधियां लाने
का उसमें उल्लेख नहीं है।
रामोपाख्यान में लक्ष्मण को शक्ति लगने का वृत्तान्त नहीं है। उसमें रावण माया द्वारा राम और लक्ष्मण
का रूप धारण किये हुए मायामय राक्षसों को उत्पन्न करता है। राम उनकी हत्या करते हैं। बाद में ब्रह्मास्त्र
द्वारा रावण को ऐसा भस्म करते हैं कि उसकी राख भी शेष नहीं रहती।
“न च भस्माप्यदृश्यत” ( म० भा० ३।२९०।३३ )
रामोपाख्यान में सीता की अग्निपरीक्षा भी नहीं है। उत्तरकाण्ड में रामकथा, अयोध्या आगमन, अभिषेक
आदि का वर्णन है।
जैसा कि पहले कहा गया है, शतकोटिप्रविस्तर रामायण महाकाव्य वाल्मीकि द्वारा वर्णित हुआ है।
चौबीस हजार श्लोकोंवाला प्रसिद्ध वाल्मीकिरामायण ग्रन्थ उसी का सार है। मार्कण्डेय, व्यास आदि महर्षि भी
समाधिसम्पन्न तथा सर्वज्ञ हैं, अतः प्रसिद्ध रामायण में अनुक्त अंशों का वर्णन असङ्गत और अप्रामाणिक नहीं है।
संक्षिप्त करने की दृष्टि से रामायणोक्त कई अंशों का वर्णन न करना भी सङ्गत ही है। अतएव व्यास द्वारा वर्णित