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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

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पृष्ठ 9

प्रथमप्रकाशः १. ( ३ )

वपुषको ॥ साँकरे की साँकरन सनमुख होतेही तो दशमुख
मुख जोवै गजमुख मुखको ॥ १ ॥
टी०-बालक पाँच वर्षको हाथीको जैसे मृणाल पौनारांका सब कालमें
तोरि डारत है तैसे गणेश कठिन औ कराल भयानक औ अकाल कहे
असमयको जो दीह कहे बडो पुत्र मरणादि दासनको दुःख है ताको तोरत हैं
औ जैसे बालक पद्मिनी कमलिनीके पातको हरत तोरत है तैसे ये विपत्ति
दरिद्रादिको हरत हैं औ बालक जैसे पग सों दावि पङ्क कहे कीचको
पेलिकै पातालको पठावत है तैसे ये कलुष जे पाप हैं तिनको पठावत हैं
इहां गजराजको त्यागकरि बालक सम यासों कह्यो कि पद्मिनी पत्रादि तोरनमें
बालकको उत्साह रहत है तैसे गणेशजूको विपत्त्यादि विदारणमें बडो उत्साह
रहत है कौतुकही विदारतहैं औ गणेशजू दासनके कलङ्कको अङ्ककहे चिह्नको
दूरि करिकै जैसे भव महादेवके शीशको शशि है कलङ्क रहित ताही विधि
दासनके वपुष शरीरको राखत हैं औ जनके सन्मुख होतेही साँकर राजभयादि
ताकि साँकर बंधन जंजीरन कही नहीं रहति ऐसे जे गजमुख गणेश हैं तिनके
मुखको दशमुख जे ब्रह्मा विष्णु महेश हैं तिनके मुख जोवै कहे निरखत हैं
स्तुति करत हैं अथवा दशमुख जे दशौं दिशा हैं तिनके जे मुख हैं अर्थ यह
दशौं दिशनके प्राणी स्तुति करतहैं ॥ “पञ्चवर्षोगजोवाल-इत्यभिधानाच्चिन्ता-
मणिः” तौ इहाँ स्तुतिसों अभिकांक्षितवस्तुको मांगिवो सूचित भयो तासों
आशीर्वादात्मक मंगल है दूसरो अर्थ जो ग्रंथ कविलोग करत हैं ताकी कथा
प्रथम संक्षेपसों कहतहैं सो युक्तिसों याही मंगलाचरणमें कह्यो है बालक या
पदने श्रीरामचंद्रको जन्मसूचित भयो औ सबको कालरूप जो सुबाहु ताडकादि हैं
तिन्हें मृणालन पौनारिनके समान सहजही तोरि डारत भये मारत भये औ कठिन
औ कराल कहे भयानक ऐसा जो धनुष है औ अकाल कहे कुसमयको जो दीह
बडो दुःख है व्याह कृत उत्सवमें परशुरामकृत दुःख गर्वगति समेत तिनहुँ-
नको त्यों कहे ताही प्रकार ते मृणालन बहुवचन है तासों ताडकादि वध धनुभंग
परशुरामगतिभंग सर्वत्र समता कियो ॥ इति बालकाण्ड कथा ॥ औ राज्य-
त्यागरूप जो विपत्तिहै ताको हठिकै हरत कहे ग्रहण करत भये भरतादिको
कह्यो न मान्यो आप पद्मिनी कमलिनीके पातकहे पुष्पपत्र सम सुकुमार हैं ॥