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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

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पृष्ठ 11

प्रथमप्रकाशः १. ( ५ )
अर्थ कियो है याहूपर कोऊ हठकरै ताकारण द्वितीय प्रकारसों अर्थ बालक जो है
शिशु सो जैसे बालखेलमें मृणालनको बिनही श्रम तोरिडारे कहे तोरिडारतहै
इहाँ बालक पदमें जातिमें एकवचन है त्यां कहै ताहीविधि कठिन अतिकठोर
औ भयानक ऐसा जो शंभु धनुष है ताको बाल अवस्था में बालखेल सम राम-
चन्द्र तोरचो त्यहीमुख कहे आदिदै ताडकावधादि सीय विवाहादिजे बाल-
कांडकी संपूर्ण कथा हैं तिनको इहाँ मुखपदक्रमकी आदि मों नहीं है श्रेष्ठतामो
है औ अकाल कहे कुसमयको जो दीह दुःख है अर्थ गमराज्याभिषेकमें कैके-
यीको वर मांगिबो राम वनगमन दशरथ मरण भरतको व्रतकरि नंदिग्राममें
बसन या प्रकारको जो अकाल दुःख है त्यहि मुख जे चित्रकूट गमनादि अयो-
ध्याकांड कथा है तिनको औ विराध खर दूषणादि राक्षस्रनको मारिकै ऋषि
लोगनकी विपत्तिको सहजही पद्मिनीके पातसम हरत कहे दूरिकरन पंकरत
पंक जे पापहैं तिनको जैसे पेलिकै पातालको पठवै कहै पैठे देत हैं अर्थ अपने
दासनके जैसे पातक नाश करतहैं ताहीविधि कलुषकहे पापरूप बंधुपत्नी भोगी
जो बालिहै ताको पठायो अर्थ मारचो तिनमुख जे अरण्यकांड औ
किष्किन्धाकाण्डकी कथा हैं तिनको ऋषिनकी विपत्ति हरणादि अरण्यकाण्ड
कथा जानो आदिपदते सीयहरणादि जानो औ वालिवधादि किष्किन्धाकाण्ड
कथा जानो आदि पदते सप्तताल बेधन सुग्रीव राज्याभिषेकादि जानी औक जो
है अग्नि तासां लंकके जे अंककहे ध्वजादि चिह्नहैं तिन्हें दूरिकै कहे विध्वंस
कारिकै जारिकै इति अर्थ हनुमानके करसों लंकाजारिकै दास जो विभीषण है
ताके वपुषको आजु पर्यंत राखतहैं रक्षाकरतहैं अर्थ रावणादिको मारि जो विभी-
षणको लंकाको राज्यदियो तामें आजुलों रक्षा करत हैं तिनमुखकथनको हनु-
मान्‌के करसों लंकादाहादि सुन्दरकाण्डकी कथा जानो औ रावणादिको बध-
करि बिभीषणको राज्यदानादि लंकाकाण्ड कथाजानौ औ भरतको जो साँकर
कहे नाँदिग्राममें यतीवेष बसिबे को कष्ट है ताहीकी जो साँकर कहे बंधन जंजीर
है ताको जो नशन कहे नाश करिबोहै अर्थ रामचन्द्र आइकै भरत यतीवेषको
क्लेश दूरि करचो है तेहिमुखकस है आदिदै औज कहे यज्ञ मुख कहे आदिदै
अर्थ अश्वमेधादि जे मुख कहे मुख्य कथा हैं तिनको योग कहे गीत है अर्थ
कथन है ताको जे जोवै कहे देखत हैं. अर्थ इन कथनसों युक्त रामचंद्रिकाको जे
पढतहैं तेही कहे निश्चय करिकै दशमुख मुख होत हैं अर्थ वक्तृत्व करिकै दशमुखके