राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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महारावत संग्रामसिंह ( रामसिंह )
वि० सं० ई० स०
( १७७५ ) ( १७१८ ) महारावत की गद्दीनशीनी ।
( १७७६ ) ( १७१६ ) महारावत का देहांत ।
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महारावत उम्मेदसिंह
( १७७६ ) ( १७१६ ) महारावत की गद्दीनशीनी ।
( १७७८ ) ( १७२१ ) महारावत का देहांत ।
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महारावत गोपालसिंह
( १७७८ ) ( १७२१ ) महारावत की गद्दीनशीनी ।
१७७८ १७२१ महारावत का उदयपुर जाना ।
( १७७६ ) ( १७२२ ) महारावत को धरियावद का परगना मिलना ।
१७८७ १७३० महारावत का डूंगरपुर से महाराणा और पेशवा
की सेना का घेरा उठवाना ।
१७६१ १७३४ परामर्श के लिए मरहटों की सेना के देवलिया के
समीप एकत्रित न होने के लिए महाराणा जगतसिंह-
( दूसरा ) का बिहारीदास के नाम पत्र भेजना ।
१७६२ १७३६ पेशवा बाजीराव के राजपूताने में आने पर महा-
रावत का उसके साथ रहना ।
१७६७ १७४० सवाई जयसिंह के जोधपुर घेरने पर महारावत का
महाराणा के शामिल होना ।
१८१३ १७५६ महारावत का देहांत ।