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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 469, कुल 534 में से

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परिशिष्ट संख्या ३
प्रतापगढ़ राज्य के इतिहास का कालक्रम
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महारावत क्षेमकर्ण
वि० सं० ई० स०
( १४६४ )¹ ( १४३७ ) क्षेमकर्ण का सादड़ी पर अधिकार करना ।
( १५३० ) ( १४७३ ) क्षेमकर्ण की मृत्यु ।
महारावत सूरजमल
( १५३० ) ( १४७३ ) सूरजमल की गद्दीनशीनी ।
१५६१ १५०४ सूरजमल के संबंध में चारणी की भविष्यवाणी ।
( १५६३ ) ( १५०६ ) मालवा के सुलतान नासिरशाह के पास सहायतार्थ
जाना ।
( १५६४ ) ( १५०७ ) सूरजमल और सारंगदेव का मालवा की सेना के
साथ जाकर महाराणा रायमल से युद्ध करना ।
( १५६५ ) ( १५०८ ) सूरजमल का मेवाड़ छोड़ कांठल में आबाद होना ।
( १५८७ ) ( १५३० ) सूरजमल की मृत्यु ।
महारावत वाघसिंह
( १५८७ ) ( १५३० ) वाघसिंह की गद्दीनशीनी ।
१५६२ १५३५ बहादुरशाह की चित्तोड़ की चढ़ाई के अवसर पर
वाघसिंह का मारा जाना ।
( १ ) ऊपर कोष्ठकों में दिये हुए संवत् अनुमानिक हैं, निश्चित नहीं ।