राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२२ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास
अख्तियार तो तुमको होगा, मगर फ़ैसला करने का अख्तियार सिर्फ़ उन
जुर्मों के मुक़दमों का ही होगा, जिनकी सज़ा छः महीने क़ैद और तीन
सौ रुपये जुरमाना तक है और इससे अधिक सज़ा के सब मुक़दमे तर-
तीब और तकमील मिसल होने के बाद मय अपनी राय के फ़ैसले के वास्ते
तुमको वाज़ाब्ते अदालत सदर फ़ौजदारी में चालान करने होंगे। उनमें से
जो मुक़दमे अदालत सदर फ़ौजदारी-द्वारा फ़ैसला करने के होंगे, उनको
तो अदालत मौसूफ़ खुद फ़ैसल करेगी और जो उसके अधिकार के बाहर
होंगे, उनको वो अपनी तजवीज़ के साथ आख़िरी फ़ैसले के वास्ते राजेश्री
महकमा खास में भेजेगी।
( ३ ) जिन फ़ौजदारी मुक़दमों में मुद्दई खालसे या किसी दूसरी
जागीर अथवा किसी दूसरी रियासत का होगा और मुद्दालह तुम्हारे पट्टे
का होगा या कोई मुजरिम खालसे या किसी दूसरी जागीर या किसी
रियासत गैर का तुम्हारे पट्टे में कहीं पनाह लेगा तो ऐसे मुक़दमे ज़िले
के हाकिम की अदालत में दायर होंगे और माल तथा मुजरिम तुमको
अदालत मौसूफ़ के सुपुर्द करने होंगे।
( ४ ) जिन दीवानी मुक़दमों में मुद्दई तो खालसे या किसी दूसरी
जागीर अथवा किसी रियासत गैर का होगा और मुद्दालह तुम्हारे पट्टे का
आसामी होगा वे ज़िला हाकिम की अदालत में दायर होंगे।
( ५ ) जिन दीवानी व फ़ौजदारी मुक़दमों में मुद्दई तो तुम्हारे पट्टे का
होगा और मुद्दालह खालसे या किसी दूसरी जागीर अथवा किसी रियासत
गैर का होगा वे ज़िले की अदालत में दायर होंगे।
( ६ ) जिन दीवानी या फ़ौजदारी मुक़दमों में तुम खुद मुद्दई या
मुद्दालह होंगे, उनके सुनने और फ़ैसला करने का अख्तियार तुमको न
होगा, बल्कि ऐसे मुक़दमे श्रीदरवार की अदालत में दायर और फ़ैसल
होंगे।
( ७ ) जिन दीवानी या फ़ौजदारी मुक़दमों के फ़ैसल करने का
अख्तियार तुमको क़लम' एक व दो में दिया गया है, उनमें तुम्हारी