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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 238, कुल 534 में से

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पृष्ठ 238

(ई० स० १९०८) के स्थान पर वि० सं० १७६४ (ई० स० १७०७) लिख दिया हो।
महारावत प्रतापसिंह के दस राणियां थीं¹, जिनमें एक बीकानेर के
स्वामी महाराजा कर्णसिंह की पौत्री और पद्मसिंह की पुत्री प्रेमकुंवरी थी²।
[महारावत की राणियां] इस विवाह के अवसर पर महारावत ने चारण-
[और संतति] भाटों आदि को बहुत कुछ द्रव्य देकर बड़ी उदा-
रता प्रकट की थी³। उसके पृथ्वीसिंह, कीर्तिसिंह⁴
भीमसिंह, दौलतसिंह और इंद्रसिंह नामक पांच कुंवर हुए⁵।
(१) प्रतापगढ़ राज्य के बड़वे की ख्यात; पृ० ५-६। प्रतापगढ़ से प्राप्त एक
पुरानी ख्यात में उक्त महारावत के केवल ६ राणियां होने का उल्लेख है।
(२) प्रतापगढ़ से प्राप्त पुरानी ख्यात; पृ० ६। इस ख्यात में महारावत की
राणियों के जो नाम दिये हैं, वे बड़वे की ख्यात से नहीं मिलते एवं बड़वे की ख्यात में
महारावत की राठोड़ राणी प्रेमकुंवरी का नाम ही नहीं है। उस( प्रतापसिंह )के साथ
उसकी दो राणियां—गौड़ धर्मकुंवरी, जो अजमेर के प्रसिद्ध राजा विठ्ठलदास की पुत्री
और गोपालदास की पौत्री थी तथा कछवाही विजयकुंवरी, जो अमरसिंह की पौत्री
और सबलसिंह की पुत्री थी, सती हुईं।
(३) वीरविनोद; द्वितीय भाग, पृ० १०६२।
(४) मालवे के सूबेदार शायस्ताखां की ता० ३ शावान सन् जुलूस ४७, हि०
स० १११४ (वि० सं० १७५६ पौष सुदि ५ = ई० स० १७०२ ता० १२ दिसंबर)
की रिपोर्ट से प्रकट है कि महारावत प्रतापसिंह का छोटा पुत्र कीर्तिसिंह मालवे के शाही
सूबेदार के पास (संभवतः देवलिया की सेना के साथ) रहा करता था और उन दिनों
महाराणा अमरसिंह (दूसरा) की रामपुरा पर चढ़ाई होने का संवाद सुन वह देवलिया
चला गया था, जिसका कारण यही हो सकता है कि उन दिनों उक्त महाराणा की देवलिया
पर भी सेना भेजने की ख़बर फैल रही हो (वीरविनोद; जि० २, पृ० ७४७-४८)।
(५) प्रतापगढ़ राज्य के बड़वे की ख्यात; पृ० ५। प्रतापगढ़ राज्य से प्राप्त
एक पुरानी ख्यात में महारावत के कुंवरों में दौलतसिंह का नाम नहीं है एवं उसकी
तीन कुंवरियों के नाम बनेकुंवरी, सौभाग्यकुंवरी और फूलकुंवरी दिये हैं। "वीरविनोद"
(द्वितीय भाग, पृ० १०६२) में महारावत की पुत्रियों में से एक का विवाह जोधपुर
के स्वामी महाराजा अजीतसिंह से होने का उल्लेख है, जो अन्य किसी ख्यात के आधार
पर है। हमारे पास प्रतापगढ़ राज्य से जो ख्यातें आई हैं, उनमें कहीं इस विषय का
उल्लेख नहीं है। "वीरविनोद" में जोधपुर राज्य की ख्यात के आधार पर महारावत
प्रतापसिंह के कुंवर पृथ्वीसिंह की पुत्री का विवाह महाराजा अजीतसिंह से होना मानकर