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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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पृष्ठ 14

( ५ )
विषय पृष्ठाङ्क
बाघसिंह ... ... ... ... ७४
राज्यप्राप्ति ... ... ... ७४
बाघसिंह का खानवे के युद्ध में महाराणा के साथ रहना ७४
बाघसिंह का मालवे में जाना ... ... ७५
बहादुरशाह की चित्तौड़ पर चढ़ाइयां ... ७६
चित्तौड़ की रक्षार्थ बहादुरशाह से लड़कर बाघसिंह का मारा जाना ७८
बाघसिंह की राणियां और संतति ... ... ८३
रावत बाघसिंह का व्यक्तित्व ... ... ८४
रायसिंह ... ... ... ... ८५
राज्यप्राप्ति ... ... ... ८५
धाय पन्ना का बनवीर के डर से उदयसिंह को
रायसिंह के पास ले जाना ... ८५
बनवीर को चित्तौड़ से निकालने के लिए रावत रायसिंह का
महाराणा की सहायतार्थ जाना ८७
रायसिंह का देहान्त और उसकी संतति ... ८८
विक्रमसिंह ( बीका ) ... ... ... ६०
राज्यप्राप्ति ... ... ... ६०
सादड़ी की जागीर छूट जाने पर विक्रमसिंह का
कांठल में जाना ... ... ६०
हाजीखां की सहायतार्थ महाराणा के साथ कुंवर तेजसिंह
को भेजना ... ... ... ६१
विक्रमसिंह का सुहागपुरा, खरोट, कोटड़ी,
नीनोर, दलोट और पलथाना पर अधिकार करना ६४
ख्यातें और देवी मीणी की स्मृति में देवलिया बसाने की कथा ६६
कांधल को धमोतर, सुरताणसिंह को ढोढरयाखेड़ा और
विजयसिंह को खरोट की जागीर देना ... ६७