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राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)

राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)

Raja Yoga - Swami Vivekananda with Patanjali Yoga Sutras

स्वामी विवेकानन्द / महर्षि पतञ्जलि द्वारा

DevanagariHindipublished307 पृष्ठ

पृष्ठ 8, कुल 307 में से

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पृष्ठ 8

"प्रत्येक आत्मा अ-व्यक्त ब्रह्म है ।
बाह्य एव अन्त.प्रकृति को वशीभूत करके आत्मा
के इस ब्रह्मभाव को व्यक्त करना ही जीवन का
चरम लक्ष्य है ।

कर्म, उपासना, मन सयम अथवा ज्ञान, इनमे से
एक, एक से अधिक या सभी उपायो का सहारा
लेकर अपना ब्रह्मभाव व्यक्त करो और मुक्त
हो जाओ ।

बस यही धर्म का सर्वस्व है । मत, अनुष्ठान-
पद्धति, शास्त्र, मन्दिर अथवा अन्य बाह्य क्रिया-
कलाप तो उसके गौण अग-प्रत्यग मात्र हैं ।"

—विवेकानन्द