राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२६ राजतरंगिणी
राजा युधिष्ठिर को दरद देश निवासियों ने उपहार दिया था । ( सभा पर्व ५२:१३ )
वनवास काल में सुबाहु की राजधानी में जाते समय पाण्डव लोग दरद देश होकर गये थे । ( वन
पर्व १७७:१२ )
दरदराजको पाण्डवों ने महाभारत युद्ध में भाग लेने के लिए आमन्त्रित किया था । ( उद्योग
पर्व ४:१५ )
दुर्योधन के पक्ष में महाभारत युद्ध में दरद देश के योद्धाओं ने भाग लिया था। ( भीष्म पर्व ५१:१६ )
भगवान् श्रीकृष्ण ने दरद देश पर आक्रमण किया था । ( द्रोण पर्व ७०:११ )
महाभारत में दरद को एक जाति माना गया है। पूर्वकाल में क्षत्रिय थे कालान्तर में ब्राह्मणों
के कोप के कारण शूद्र हो गये थे । ( अनुशासन पर्व ३५:१७-१८ )
एक भारतीय जनपद दरद का वर्णन शल्य पर्व में किया गया है । ( शल्य पर्व ५०:५० )