राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रथम तरंग ३५३
तेन क्रमागतं राज्यं सावधानेन शासता ।
अनुजग्मे मितं कालं पूर्वभूपालपद्धतिः ॥३५१॥
३५१. उसने क्रमागत राज्य का सावधानी पूर्वक शासन करता हुआ कुछ दिन तक
पूर्ववर्ती राजाओं की पद्धति १ का अनुकरण किया ।
काले कियत्यपि ततो यात्यभाग्यवशादसौ ।
सिषेवे श्रीमदन्नीतो यत्किञ्चनविधायिताम् ॥३५२॥
३५२. कुछ समय पश्चात् अभाग्य वश श्रीमद से उन्मत्त वह यत्किंचनविधायी १ हो गया ।
नान्त्वग्रहीदनुग्राह्यान्न संजग्राह धीमतः ।
न प्रवृत्तोपचाराणां प्रागिवासीत्प्रियंकरः ॥३५३॥
३५३. वह अनुग्रह पात्रों पर अनुग्रह, धीमानों का संग्रह, तथा सेवारत सेवकों का पूर्ववत्
प्रियकर्त्ता नहीं रह गया था ।
दुर्विद्यपर्षदा सार्कं निर्विशेषं सभाजितैः ।
परिजहे स दुर्जान्तो जाततेजोवधैर्बुधैः ॥३५४॥
३५४. दुर्विद्य गण के साथ, निर्विशेष रूप से सम्मानित तथा अपमानित विद्वानों ने उस
दुर्जान्त राजा का त्याग कर दिया ।
सर्वत्र समदृष्टित्वं गुणोऽयं खलु योगिनः ।
अकीर्त्तिहेतुः स महान्दोषस्तु पृथिवीपतेः ॥३५५॥
३५५. सर्वत्र समदर्शिता योगियों के लिये गुण है किन्तु वह पृथिवीपति की अकीर्ति का हेतु
तथा महान् दोष है ।
उसकी फ़ौज और रैयत उससे मुतनफ़र हो गयी । पादटिप्पणियाँ :
आसपास के हुक्काम जो दिल और जान से राजा के ३५१ (१) पद्धति : यहाँ शासन पद्धति
मतोअ और फ़रमांबरदार थे, एक एक करके इसके अर्थ लगाना चाहिए । पूर्ववर्ती राजाओं की शासन
बागी होने लगे । हकूमत के अहले हल व अकदौद पद्धति का अनुकरण कुछ दिन तक राजा करता रहा ।
ज़वान इसकी मजवली पर मुत्तफ़िक हो गये । अहले ३५२ (१) यत्किंचनविधायी : राजा
ज़माना की यह बेमुरव्वती देखकर युधिष्ठिर दो-तीन स्वेच्छाचारी, उद्दण्ड, अकर्मण्य, उच्छृंखल, निरंकुश
रकीबों के हमराह हिन्दुस्तान की तरफ भाग गया । तथा अविहित, अकरणीय कर्म करने वाला हो गया
यहाँ एक राजा ने उसे पकड़कर जान से मार डाला । था । कल्हण का यही तात्पर्य यहाँ प्रकट होता है ।
इसकी मुद्दत हकूमत बावन बरस और आठ माह पाठभेद :
थी ।' पृष्ठ ५० श्लोक संख्या ३५४ में 'परिजहे' का पाठभेद
पाठभेद : 'परिजिहे' मिलता है ।
श्लोक संख्या ३५१ में 'अनुजग्मे' का 'मनुजग्मे' पादटिप्पणियाँ :
तथा 'मितं' का पाठभेद 'सितं' मिलता है । ३५५. (१)समदर्शी : योगियों तथा सज्जनों के
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