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सर्वकोश
पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary

श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,267 पृष्ठ

पृष्ठ 927, कुल 1267 में से

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पृष्ठ 927

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क्तम् ॥ ४४ ॥ - that is the end of तदुक्तम् ॥ ४४ ॥!
Now look at the commentary on Sutra 44 (Adhikarana 26, Pradanadhikarana):
The sutra has words:

  1. प्रदानवत्
  2. एव
  3. तदुक्तम्
    Wait! Where would 'तद्गृहेः' come from if the sutra is प्रदानवदेव तदुक्तम्?
    Wait, is it 'तद्गृहेः' or 'तद्ग्रहे' or 'तदुक्तेः'?
    LOOK AT THE LETTERS:
    त
    दु (da with u-kara ु!)
    क्तेः (ka-ta with e-kara and visarga ेः!)
    ' त दु क्तेः ' !!!!!!!!!
    YES! तदुक्तेः!
    Look at it:
    त
    दु
    क्तेः
    'तदुक्तेः'!
    Because the sutra word is तदुक्तम्!
    In the commentary, the commentator explains तदुक्तम् as:
    'तदुक्तेः' ब्रह्मज्ञानस्य साधनं, न श्रवणादिमात्रमिति सूत्रार्थ उक्तो भवति ॥ २६ ॥