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सर्वकोश
पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary

श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,267 पृष्ठ

पृष्ठ 682, कुल 1267 में से

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पृष्ठ 682

ः, किन्तु सर्वोऽपि ज्ञः पराभास इति सूत्रार्थ उक्तो भवति ॥`
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    ( २ ) देवदानवादिवैचित्र्यस्य रागद्वेषमोहाख्यदोषनिमित्तकत्वो
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    पपत्तेः किमदृष्टकारणकत्वकल्पनयेत्याशङ्कां परिहरत्सूत्रमुपन्यस्य व्या
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    चष्टे—अभिसन्धीति ॥ न केवलं सुरनरादिवैचित्र्यं, किन्तु इच्छादि
    Wait, look at the pratika in L32:
    चष्टे—अभिसन्धीति ॥ or अभिसन्ध्यादिष्वपि?
    In L32: चष्टे—अभिसन्धीति ॥ or अभिसन्धीति?
    Let's zoom in on अभिसन्ध्वीति or अभिसन्धीति:
    Letters: अ भि स न्ध् ... wait, is that धी or वी or ध्या?
    Look at: अ-भि-स-न्धी-ति?
    Wait, the Sutra is: `अभिसन्ध्यादिष्व