पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)
Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary
श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा
पृष्ठ 1098, कुल 1267 में से
संदर्भ में पढ़ें?
Wait, look at line 13:
"यत इत्याद्युपस्कार्यम्" - wait, there is only ONE द्या:
य - त - इ - त्या - द्यु - प - स्का - र्य - म्
Wait! Look at the image line 13:
"यत इत्याद्याद्युपस्कार्यम्"
Wait, is there "द्या" and then "द्यु"?
Let's zoom in on line 13, first word:
"यत इत्या" -> then there is "द्यु" or "द्या"?
It is: "इत्यादावुपस्कार्यम्"??
Wait! Look at the letters:
इ (i)
त्या (tyā)
दा (dā)
वु (vu)
प (pa)
स्का (skā)
र्य (rya)
म् (m)
Wait! Could it be "इत्यादावुपस्कार्यम्"?
इति + आदौ + उपस्कार्यम् = इत्यादावुपस्कार्यम्!
"यत इति आदौ उपस्कार्यम्" = The word 'यत' is to be supplied at the beginning (आदौ)!
WOW, THAT MAKES TOTAL SENSE!
"यत इति आदौ उपस्कार्यम्" -> "यत इत्यादावुपस्कार्यम्"!
Because: Look at line 8: "तथा चेत्थं योजना—यतः 'अग्निर्ज्योतिः' इत्यादिना..."
He supplied 'यतः' at the beginning!
So here