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पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

Prithvirajavijaya Mahakavya of Jayanaka with Commentary

कश्मीरी कवि जयानक (टीकाकार: जोनरराज) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

पृष्ठ 300, कुल 330 में से

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पृष्ठ 300

)वीरकैतव... -> wait, (l.15): तत्तादृग्रघु(l.15)वीर-
Line 14: [तैः कृत्तैः] पुर(l.16)तो
Line 16: तै(l.17)र्दशभिशिरोभिः
Line 17: हेतु(l.18)माह
Line 18: भेदंस्तस्य(l.19)
Line 20: करोति ॥ (l.20)

Now check verse numbers:
Line 5: 83.
Line 11: 84.
Line 20: 85.

Let's check every single word:
Line 1:
एकादशः सर्गः. २८३

Line 2:
दर्शयति करगतं समरे

Line 3:
निशिताग्रपाणिज(l.11)मिषाद्दशाननः ॥

Line 4:
जितस्येन्द्रस्य हृतमिव वज्रधाराशतं रावणो¹ नखव्याजाद्धस्तगतं दर्श-
(Wait, is there a footnote 1 after रावणो? Yes: "रावणो¹")

Line 5:
यति ॥(l.12) 83.

Line 6:
हिमकिरणकिरीटकुट्टित-

Line 7:
स्ववदनवेदनया स्मृतिस्पृशा