पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूचीपत्र । ७
(२) दसम समय ।
( पृष्ठ १८१ से २५४ तक )
पृष्ठ
हरि रूप का मंगलाचरण ॥ ... ... ... ... १८१
दशावतार का नाम स्मरण ॥ ... ... ... ... ”
दशावतार की स्तुति ॥ ... ... ... ... ”
ग्रन्थोक्ति । ... ... ... ... ... १८६
मत्स्यावतार की कथा ॥ ... ... ... ... १८७
कच्छपावतार की कथा ॥ ... ... ... ... १८६
७ वराहावतार की कथा ॥ ... ... ... ... १६३
८ नृसिंहावतार की कथा ॥ ... ... ... ... १६६
६ वामनावतार की कथा ॥ ... ... ... ... २०२
१० परशुरामावतार की कथा ॥ ... ... ... ... २०५
११ रामावतार की कथा ॥ ... ... ... ... २१०
१२ कृष्णावतार की कथा ॥ ... ... ... ... २१८
१३ बौद्धावतार की कथा ॥ ... ... ... ... २५२
१४ कल्कि अवतार की कथा ॥ ... ... ... ... २५३
१५ उपसंहार का कथन ॥ ... ... ... ... २५४
( ३ ) दिल्ली किल्ली कथा ।
( पृष्ठ २५५ से पृष्ठ २७४ तक )
१ मंगलाचरण ॥ ... ... ... ... २५५
२ चंद का अपनी स्त्री को कहना कि अनंगपाल की पुत्री को पुत्र उत्पन्न होने से दिल्ली की पूर्व कथा का
प्रसंग प्राप्त हुआ है ॥ ... ... ... ... ”
३ बालकपन में पृथ्वीराज का दिल्ली प्राप्त करने का स्वप्न देखना ॥ ... ... २५६
४. पृथ्वीराज की माता का उससे स्वप्न का वृत्तान्त पूछना ॥ ... ... ”
५ पृथ्वीराज का माता को स्वप्न का वृत्तान्त कहना ॥ ... ... ”
६ पृथ्वीराज की माता का स्वप्न वृत्तान्त सुन अद्भुत रस में रंजित होना ॥ ... ... २५७
७ उसका ज्योतिषियों को बुला स्वप्न का सत्यफल पूछना ॥ ... ... ”
८ ज्योतिषियों का उत्तर देना कि पृथ्वीराज दिल्ली का राजा होगा ॥ ... ... ”
६ ज्योतिषियों को विदा कर माता और पुत्र का एक गृह में जा बैठना ॥ ... ... २५८
\Bigg} १० अनंगपाल की पुत्री का अपने पुत्र के आगे दिल्ली की पहिली किल्ली की पूर्व कथा का कहना और \atop - राजा कल्हन का वनक्रीडा करते सृसा और स्वान के चरित्र से भूमि का धीरत्व देखना ॥ ... ”
११ उस वीर भूमि में व्यास का कील्ली गाड़ना ॥ ... ... ”
१२ वहां कल्हन का कल्हनपुर बसा कर राज करना और फिर उसके कितनोक पीढ़ी पीछे अनंगपाल का होना २५६
१३ इतनी कथा सुनकर पृथ्वीराज के मन में अचरज होना ॥ ... ... ”
१४ विपरीत समय का आना देख कर सकल सभा का संकित होना ॥ ... ... ”
\Bigg} १५ अनंगपाल की पुत्री का अपने पुत्र ( पृथ्वीराज ) के आगे अपने पिता के फिर से दिल्ली बसाने के \atop लिये पाषाण और किल्ली गाड़ने की कथा का कहना ॥ ... ... ... ”
\Bigg} १६ व्यास का कहना कि पांच घड़ी तक पाषाण को हाथ न लगाने से वह शेष के सिर पर दृढ़ हो \atop जायगा परन्तु राजा का इसे अनर्थ कर मानना ॥ ... ... ... २६०
१७ साठ अंगुल की किल्ली गाड़ना अर्थात् शंकुघात कर्म करना ॥ ... ... ... ”