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सर्वकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 4, कुल 470 में से

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पृष्ठ 4

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सूचीपत्र ।
( १ ) आदि पर्व्व ।
( पृष्ठ १ से १८० तक )
पृष्ठ ।
आदिदेव, गुरु, वाणी, लक्ष्मीश, सुरनाथ और सर्वेश का मंगलाचरण ॥ ... ... १
धर्म्म-स्तुति ॥ ... ... ... ... ... ८
कर्म्म-स्तुति ॥ ... ... ... ... ... ६
मुक्ति-स्तुति ॥ ... ... ... ... ... १०
पूर्व कवियों की स्तुति और उच्छिष्ट संज्ञा कथन ॥ ... ... ... ”
चंद की स्त्री अपने पति के उच्छिष्ट संज्ञा कथन में शंका करती है ॥ ... ... १२
चंद अपनी स्त्री की शंका का समाधान करता है ॥ ... ... ... १३
चंद की स्त्री पुनश्च शंका करती है ॥ ... ... ... ... ”
चंद अपनी स्त्री कि शंका का पुनश्च समाधान करता है ॥ ... ... १४
चंद अपनी स्त्री के आगे ईश्वर के ऐश्वर्य का वर्णन करता है ॥ ... ... ”
चंद की स्त्री अपने पति से अष्टादश पुराणों की अनुक्रमणिका पूछती है ॥ ... ... १६
चंद अष्टादश पुराणों की अनुक्रमणिका का कथन करता है ॥ ... ... ... ”
चंद अपनी लघुता वर्णन करता है ॥ ... ... ... ... १७
$\left.{l}चंद उत्तापित होकर अपने को पूर्व-कवियों का दास होना उन की उक्ति को कहना और अपनी
को बकना कहता है ॥\right}$ १८
चंद खलों का स्वभाव वर्णन करके सुजनों के निमित्त अपना काव्य रचन करना कहता है ॥ ... ”
सरस्वती की स्तुति ॥ ... ... ... ... ... ”
गणेश की स्तुति ॥ ... ... ... ... ... ”
गणपति की उत्पत्ति की कथा ॥ ... ... ... ... २०
शंकर की स्तुति ॥ ... ... ... ... ... २१
कवि की आशा का स्वरूप वर्णन ॥ ... ... ... ... २२
चंद का काव्य समुद्र कैसा है ॥ ... ... ... ... ... ”
कोई अशुद्ध पढ़नेवाला चंद को काव्य-संबन्धी-दोष न दे ॥ ... ... २३
इस ग्रंथ में चंद ने क्या क्या कथन किया है ॥ ... ... ... ”
रासो को रसिया सरस उच्चारै ॥ ... ... ... ... ”
रासो का तत्त्वज्ञान कैसे होगा ॥ ... ... ... ... २४
जो रासो को सुगुरु से पढ़ता है वह कुमति नहीं दरसाता ॥ ... ... ... ”
रासो किस को अच्छा और किस को बुरा प्रतीत होता है ॥ ... ... २५
इस ग्रंथ के काव्य की संख्या का कथन ॥ ... ... ... ”
रासो के ढँके हुए अर्थ के विषय में कवि का कथन ॥ ... ... ... ”
इस ग्रंथ के विषयों का संक्षेप कथन ॥ ... ... ... ”
राजा परीक्षित की तक्षक दंशन और जन्मेजय की सर्पसत्र कथा ॥ ... ... २६
उस तक्षक का आबू पर अपना अर्बुद नाम धर रहना ॥ ... ... ३३
गालव ऋषि के शिष्य उत्तङ्क का उपाख्यान ॥ ... ... ... ”
वशिष्ठ ऋषि का आबू पर तप करना और उनकी नंदनी गौ का अथाह बिल में गिरना .. ३४